वायु प्रदूषण

विश्व स्वास्थ्य संगठन : विश्व के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में 14 भारतीय शहर

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा जारी वैश्विक शहरी वायु प्रदूषण डेटाबेस के अनुसार, 14 भारतीय शहरों ने 2016 में पीएम 2.5 के कणों के मामले में दुनिया के 20 सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में स्थान पाया है।
इन 14 शहरों में दिल्ली, वाराणसी, कानपुर , फरीदाबाद, गया, पटना, आगरा, मुजफ्फरपुर, श्रीनगर, गुड़गांव, जयपुर, पटियाला और जोधपुर शामिल हैं । इसके बाद अली सुबा अल-सलेम (कुवैत) और चीन और मंगोलिया के कुछ शहर सूची में शामिल हैं । पीएम 10 के स्तर के मामले में, भारत के 14 शहरों को 20 सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल किया गया।

पृष्ठभूमि

पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) में जीवाश्म ईंधनों का सर्वाधिक योगदान होता है वायु प्रदूषण का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधनों का अनियंत्रित दहन है। डीज़ल से चलने वाले सार्वजनिक परिवहन, वाहन तथा शक्ति संयंत्र वायु प्रदूषण के एक अन्य प्रमुख कारण होते हैं। इस रिपोर्ट में सभी शहरों को पीएम10 के औसत स्तर पर मापा गया है। अन्य शहरों की तुलना में दिल्ली में कई अधिक निगरानी केंद्र स्थित होने के बावजूद वायु गुणवत्ता का खराब स्तर चिंता का विषय बना हुआ है। 90% से अधिक वायु प्रदूषण से संबंधित मौतें कम और मध्यम आय वाले देशों (भारत समेत) में मुख्य रूप से एशिया और अफ्रीका में होती हैं। इसके बाद पूर्वी भूमध्य क्षेत्र, यूरोप और अमेरिका के निम्न और मध्यम आय वाले देश वायु प्रदूषण से प्रभावित है। शहरी क्षेत्रों में रहने वाले 80% से अधिक लोग डब्ल्यूएचओ सीमा से अधिक होने वाले वायु गुणवत्ता के स्तर का सामना कर रहे हैं। जबकि दुनिया के सभी क्षेत्र इससे प्रभावित हैं, कम आय वाले शहरों की आबादी इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होती है।

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पर्यावरण मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का मसौदा जारी किया

पर्यावरण मंत्रालय ने वायु प्रदूषण को कम करने के लिए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (एनसीएपी) का मसौदा जारी किया है। इसका उद्देश्य देश भर में वायु प्रदूषण की समस्या को व्यापक तरीके से निपटाना है। एनसीएपी का लक्ष्य निर्धारित समय सीमा में देश के सभी स्थानों पर निर्धारित वार्षिक औसत परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा करना है। हालांकि यह किसी विशिष्ट लक्ष्य और समय सीमा का उल्लेख नहीं करता है राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत, पर्यावरण, वन तथा जलवायु परिवर्तन मंत्रालय वायु प्रदूषण को कम करने के लिए कई उपाय करने की योजना बना रहा है।

राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम का उद्देश्य

o व्यापक और विश्वसनीय डेटाबेस को सुनिश्चित करने के लिए देश भर में प्रभावी और कुशल परिवेश वायु गुणवत्ता निगरानी नेटवर्क को विकसित करना।
o वायु प्रदूषण की रोकथाम हेतु समय पर उपायों के लिए कुशल डेटा प्रसार और सार्वजनिक आउटरीच तंत्र विकसित करना।
o वायु प्रदूषण की रोकथाम, नियंत्रण और कमी के लिए प्रबंधन योजना तैयार करना ।

टिप्पणी

इससे पहले केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन ने कहा था कि पर्यावरण मंत्रालय को लगभग 100 गैर-प्राप्ति शहरों (non-attainment cities) में वायु प्रदूषण को तीन साल में 35% और पांच साल में 50% कम करने की उम्मीद है। गैर-प्राप्ति वाले शहरों (non-attainment cities) में उन मानकों को लिया जाता है जहाँ वायु की गुणवत्ता राष्ट्रीय परिवेश वायु गुणवत्ता मानकों से भी ख़राब स्थिति में हैं।

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