विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्‍द्र

मौसम की सटीक जानकारी हासिल करने के लिए आरएच-300 ध्वनि रॉकेट को प्रक्षेपित किया गया

भारत ने मौसम की सटीक जानकारी हासिल करने के लिए 06 अप्रैल 2018 को एक महत्वपूर्ण रॉकेट लॉन्च किया. विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र द्वारा विकसित केरल के थुम्बा इक्वाटोरियल रॉकेट लॉन्चिंग स्टेशन से आरएच-300 ध्वनि रॉकेट को प्रक्षेपित किया गया.

इसे अंतरिक्ष में रॉकेट इक्वेटोरियल लॉन्चिंग स्टेशन (टीइआरएलएस) से भेजा गया है. मौसम की इससे सटीक जानकारी मिल सकेगी तथा वायुमंडल की निचली सतह पर होने वाली उथल पुथल का सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा. इस तरह का अध्ययन सेंटर ने पहले से शुरू कर रखा है. आरएच 300 एमके 2 रॉकेट के जरिये इसके तहत आंकड़े जुटाए जा रहे हैं.

मुख्य उद्देश्य

• लंबी,मध्यम और लघु अवधि के भूमध्य रेखा तरंग मोड की विशेषताएं और प्रसार को मापना.
• भारतीय गर्मियों में मानसून और मध्य वायुमंडलीय मौसमी पवन दोलन के साथ इसका संबंध जांचना.
• लंबी अवधि के तरंगों के प्रभाव का औसत प्रवाह, गुरुत्वाकर्षण तरंग-ज्वार-ग्रहों गहरे उष्णकटिबंधीय संवहन के संबंध में और क्षोभमंडलीय कम दबाव प्रणाली के चरणों के दौरान मध्य वायुमंडलीय विभिन्नता का अध्ययन करना.

आरएच 300 ध्वनि रॉकेट का यह 21वां प्रक्षेपण है. वातावरण संबंधी अध्ययन करने के लिए वर्ष 1960 में विदेशी रॉकेट की सहायता ली गई थी. 2 मई 1965 में पहली बार स्वदेशी रॉकेट का इस्तेमाल किया गया. वर्तमान में स्वदेशी रॉकेट एवं पेलोड लॉन्च किया जा रहा है.

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इसरो तथा भेल द्वारा अंतरिक्ष ग्रेड की लिथियम-आयन बैटरी के उत्पादन के लिए हस्तांतरण समझौता किया गया |

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्‍थान (इसरो) ने अंतरिक्ष कार्यों में प्रयोग होने वाली लिथियम-ऑयन बैटरियों के उत्‍पादन हेतु भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्‍स लिमिटेड (भेल) के साथ प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण का करार किया है। ली-ऑयन बैटरी प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण से भेल बैटरियों के विनिर्माण में सक्षम हो जाएगा जिससे देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की जरूरतें पूरी की जा सकेंगी। राष्‍ट्रीय स्‍तर पर अन्‍य कार्यों के लिए भी ली-ऑयन बैटरियों के विनिर्माण के लिए यह तकनीक अपनायी जा सकेगी। कंपनी इस प्रौद्योगिकी के जरिये अंतरिक्ष स्तर के विभिन्न क्षमता के सेल (बैटरी) का विनिर्माण करेगी. यह कंपनी के कारोबार बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा है. इसरो ने लिथियम आयन बैटरी विनिर्माण प्रौद्योगिकी का विकास अपने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में किया है.

इसरो की ली-ऑयन बैटरी

ली-ऑयन बैटरियों का इसरो की ओर से उपयोग उनके अत्‍याधिक ऊर्जा घनत्व, विश्वसनीयता और लंबी अवधि तक चलने के गुणों कारण उपग्रह और अंतरिक्ष यानों के प्रक्षेपण के लिए ऊर्जा स्रोतों के रूप में किया जाता है. तिरुवनंतपुरम स्थित विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केन्‍द्र (वीएसएससी) ने अंतरिक्ष संबंधी कार्यों में इस्‍तेमाल होने वाली ली-ऑयन बैटरियों का निर्माण करने की प्रौद्योगिकी को सफलतापूर्वक विकसित किया है. इन बैटरियों का इस्‍तेमाल मौजूदा समय ऊर्जा स्रेात के रूप में विभिन्न उपग्रहों और अंतरिक्ष यानों के प्रक्षेपण के लिए किया जाता है.

लाभ

ली-ऑयन बैटरी की प्रौद्योगिकी हस्‍तांतरण से भेल ऐसी बैटरियों के विनिर्माण में सक्षम हो जाएगा जिससे देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम की जरूरतें पूरी की जा सकेंगी. अन्‍य कार्यों के लिए भी राष्‍ट्रीय स्‍तर पर ली-ऑयन बैटरियों के विनिर्माण के लिए यह तकनीक अपनायी जा सकेगी.

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