विश्व व्यापार संगठन

भारत में किया जा रहा है WTO के विकासशील देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन

भारत में विश्व व्यापार संगठन (WTO) के विकासशील देशों की मंत्रिस्तरीय बैठक का आयोजन 13-14 मई, 2019 के दौरान किया जा रहा है। इस बैठक का उद्देश्य नियम आधारित व्यापार प्रणाली की बहु-पक्षीय समस्याओं पर चर्चा करना है।

मुख्य बिंदु

इस बैठक में शरीक होने वाले देश इस प्रकार हैं:

  • 6 सबसे कम विकसित देश : इसमें बेनिन, बांग्लादेश, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, चाड, यूगांडा तथा मलावी।
  • 16 विकासशील देश : इसमें तुर्की, इंडोनेशिया, मलेशिया, दक्षिण अफ्रीका, अर्जेंटीना, ब्राज़ील, मिस्र, गुयाना, जमैका, कजाखस्तान, ग्वाटेमाला, नाइजीरिया, ओमान, चीन, सऊदी अरब तथा बारबाडोस शामिल हैं।
  • इस बैठक में विश्व व्यापार संगठन के महानिदेशक रोबर्टो अज़ेवेदो भी शरीक हो रहे हैं।

उद्देश्य व महत्व

इस बैठक के द्वारा विकासशील देश तथा सबसे कम विकसित देश एक ही प्लेटफार्म पर आयेंगे और वे साझा समस्याओं पर चर्चा करेंगे। इस बैठक में विकासशील देश तथा सबसे कम विकसित देश विश्व व्यापार संगठन के सुधारों पर आगे बढ़ने के लिए आपसी सहमती पर कार्य करेंगे।

इस बैठक का आयोजन ऐसे समय में किया जा रहा है जब बहुपक्षीय नियम आधारित व्यापार प्रणाली को कई किस्म की गंभीर चुनौतियाँ का सामना करना पड़ रहा है। पिछले कुछ समय में कई देशों द्वारा एकतरफा कदम उठाये गये हैं, जिससे विभिन्न समझौता वार्ताओं में समस्या उत्पन्न हुई है। इससे विश्व व्यापार संगठन के विवाद निपटान मैकेनिज्म के अस्तित्व को खतरा उत्पन्न हो गया है।

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IMF, विश्व बैंक और WTO ने लांच की व्यापार पुनरुत्थान व समावेशी विकास रिपोर्ट

अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF), विश्व  बैंक तथा विश्व व्यापार संगठन (WTO) ने मिलकर व्यापार पुनरुत्थान व समावेशी विकास रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में तीनो अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं ने अंतर्राष्ट्रीय सेवा क्षेत्र के उदारीकरण पर बल दिया है।

मुख्य बिंदु

वैश्विक जीडीपी व रोज़गार में सेवा क्षेत्र का हिस्सा लगभग दो तिहाई है। विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए सेवा क्षेत्र को न खोलने से व्यापार, उत्पादकता तथा अर्थव्यवस्था में विकास की सम्भावना सीमित हो जाती है। इसके लिए आवश्यक है कि देश सेवा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए अनुमति दें।

सेवा क्षेत्र के उदारीकरण से विनिर्माण क्षेत्र की उत्पादकता में 22% की वृद्धि हो सकती है। इससे प्रतिभागी देशों को काफी लाभ होगा। देश के विकास तथा विनिर्माण व्यापार में सेवा क्षेत्र का योगदान काफी अधिक होता है। इससे सम्पूर्ण अर्थव्यवस्था की उत्पादकता में वृद्धि होगी तथा आय में भी वृद्धि होगी।

 

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