वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद्

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार प्रदान किये

हाल ही में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2016, 2017 तथा 2018 के लिए शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार प्रदान किये। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में वैज्ञानिकों को चौथी औद्योगिक क्रांति का लाभ उठाने का आवाहन किया तथा भारत को  विनिर्माण तथा टेक्नोलॉजी बेस्ड उद्योग का हब बनाने के लिए तकनीकें विकसित करने का आवाहन किया।

एम्स बंगलुरु के डॉ. ऋषिकेश नारायण, टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च के डॉ अमलेंदु कृष्णा समेत 11 वैज्ञानिकों को शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार 2016 से सम्मानित किया गया।

जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय दिल्ली के डॉ. दीपक गौर तथा विक्रम साराभाई अन्तरिक्ष केंद्र के डॉ. एस. सुरेश बाबु समेत 10  वैज्ञानिकों को शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार 2017 से सम्मानित किया गया।

IIT दिल्ली के डॉ. अमित कुमार तथा IIT कानपूर के डॉ. नितिन सक्सेना  समेत 13  वैज्ञानिकों को शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार 2017 से सम्मानित किया गया।

शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार

विज्ञान व तकनीक के लिए शांति स्वरुप भटनागर पुरस्कार की स्थापना 1957 में की गयी थी। इस पुरस्कार की स्थापना वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् (CSIR) के संस्थापक निदेशक डॉ. शांति स्वरुप भटनागर की स्मृति में की गयी थी। यह पुरस्कार युवा वैज्ञानिकों तथा इंजिनियरों को उनके अनुसन्धान व विकास कार्य के लिए प्रदान दिया जाता है।

यह पुरस्कार प्रतिवर्ष वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् (CSIR) द्वारा प्रदान किया जाता है। इस पुरस्कार में एक प्रशस्ति पत्र, प्लाक तथा पांच लाख रुपये प्रदान किये जाते हैं।  यह पुरस्कार जीव विज्ञानं, रसायन विज्ञान, मेडिकल साइंस, भौतिक विज्ञान, गणित, इंजीनियरिंग , वायुमंडल, महासागर तथा ग्रहीय विज्ञान के क्षेत्र में प्रदान किया जाता है। यह पुरस्कार 45 वर्ष से कम आयु के वैज्ञानिक अथवा इंजिनियर को शोधकार्य के लिए दिया जाता है।

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ICAR तथा CSIR ने खाद्यान्न तथा कृषि के क्षेत्र में सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर किये

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्  (ICAR) तथा वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् (CSIR) ने खाद्यान्न तथा कृषि के क्षेत्र में सहयोग के लिए MoU पर हस्ताक्षर किये।

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद्  (ICAR) तथा वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् (CSIR) खाद्यान्न, औषधीय तथा सुगन्धित पौधों, न्युट्रास्युटिकल, बिग डाटा विश्लेषण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग, कपास में जेनेटिक परिवर्तन, कृषि में सेंसर के उपयोग, फसल प्रबंधन इत्यादि क्षेत्रों में सहयोग करेंगे।

तकनीक प्रदर्शन तथा वितरण के लिए ICAR के कृषि विज्ञान केन्द्रों के नेटवर्क का उपयोग किया जायेगा।

सहयोग के लिएकार्यक्रमों पर चिंतन के लिए संयुक्त कार्यकारी समिति का गठन किया जायेगा, इसकी बैठक वर्ष में चार बार होगी।

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् (ICAR)

भारतीय कृषि अनुसन्धान परिषद् (ICAR) की स्थापना 15 जुलाई, 1929 को की गयी थी। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह एक स्वायत्त संस्था है, इसका प्रमुख कार्य भारत में शिक्षा अनुसन्धान तथा शिक्षा के लिए समन्वय स्थापित करना है। ICAR अपनी रिपोर्ट केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अधीन कृषि अनुसन्धान व शिक्षा विभाग को सौंपता है। केन्द्रीय कृषि मंत्री ICAR के अध्यक्ष होते हैं। इसका आदर्श वाक्य “मानवीय संवेदना के साथ कृषि अनुसन्धान” है।

वैज्ञानिक व औद्योगिक अनुसन्धान परिषद् (CSIR)

यह देश की अग्रणी स्वायत्त  अनुसन्धान व विकास संगठन है। इसकी स्थापना 1942 में की गयी थी। यह रजिस्ट्रेशन ऑफ़ सोसाइटीज एक्ट, 1960 के तहत पंजीकृत एक स्वायत्त संस्था है। इसे मुख्य रूप से केन्द्रीय विज्ञान व तकनीक मंत्रालय द्वारा फंडिंग की जाती है। प्रधानमंत्री CSIR के अध्यक्ष होते हैं। एक सर्वेक्षण में विश्व के 1207 सरकारी संस्थानों में से इसे 9वां स्थान प्राप्त हुआ था। यह देश में 38 राष्ट्रीय अनुसन्धान प्रयोगशालाओं का संचालन करती है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

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