व्लादिमीर पुतिन

संयुक्त अरब अमीरात ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को ज़ायेद मैडल से सम्मानित करने की घोषणा की

हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात ने भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को ज़ायेद मैडल से सम्मानित किये जाने की घोषणा की। श्री मोदी को यह सम्मान भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच संबंधों को मज़बूत बनाने के लिए दिए गये योगदान के लिए दिया जा रहा है। इसकी जानकारी अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन ज़ायेद अल नाहयान ने ट्वीट करके दी।

ज़ायेद मैडल संयुक्त अरब अमीरात द्वारा राजाओं, राष्ट्रपतियों तथा राष्ट्रप्रमुखों को दिया जाने वाले सर्वोच्च सम्मान है। अब तक यह सम्मान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग तथा महारानी एलिज़ाबेथ द्वितीय को प्रदान किया जा चुका है।

संयुक्त अरब भारत का पांचवा सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता है। भारत कुल तेल आयात का 8% हिस्सा संयुक्त अरब अमीरात से आयात करता है। संयुक्त अरब अमीरात भारत और फ्रांस के नेतृत्व में शुरू किये गये अंतर्राष्ट्रीय सौर गठबंधन का हिस्सा भी है। 2017 में भारत-संयुक्त अरब अमीरात के बीच का व्यापार 50 अरब डॉलर पर पहुँच गया था। संयुक्त अरब अमीरात चीन और अमेरिका के बाद भारत के तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। भारत से संयुक्त अरब अमीरात को 2016-17 में 31 अरब डॉलर का निर्यात किया गया था।

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रूस और अमेरिका ने इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज संधि को निलंबित किया

रूस ने हाल ही अमेरिका द्वारा इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज संधि से पीछे हटने की पुष्टि की थी। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने घोषणा की थी  कि अमेरिका, रूस के साथ की गयी तीन दशक पुरानी इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज संधि से अलग होगा, इस संधि पर शीत युद्ध के दौरान हस्ताक्षर किये गये थे। अब रूस ने भी इस संधि को निलंबित कर दिया है।

इंटरमीडिएट रेंज न्यूक्लियर फोर्सेज (INF) संधि

यह शीतकाल की एक महत्वपूर्ण संधि थी, इस संधि के द्वारा 500-5000 किलोमीटर की भूमि से लांच की जाने वाली परमाणु मिसाइलों के निर्माण व परीक्षण पर प्रतिबन्ध लगाया गया था। इस संधि पर दिसम्बर, 1987 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन तथा उनके सोवियत संघ के समकक्ष मिखाइल गोर्बाचेव ने हस्ताक्षर किये थे।

इस संधि के द्वारा सभी परमाणु तथा पारंपरिक मिसाइलों (जिनकी रेंज 500-1000 किलोमीटर तथा 1000 से 5,500 किलोमीटर है) , उनके लांचर पर प्रतिबन्ध लगाया गया था। इस संधि के द्वारा दो महाशक्तियों के बीच हथियारों के विकास की दौड़ पर रोक लगी तथा यूरोप में अमेरिका के नाटो सहयोगियों का रूसी आक्रमण से बचाव भी हुआ। इस संधि का निर्माण यूरोप में स्थायित्व लाने के लिए किया गया था।

संधि से पीछे हटने के कारण

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने आरोप लगाया है कि रूस ने इस संधि का उल्लंघन करता है और पहले भी कई बार उल्लंघन कर चुका है। यह आरोप रूस की कथित नोवातोर 9M729 मिसाइल (SSC-8) के विकास व तैनाती की ख़बरों के बाद लगाया गया है, यह मिसाइल यूरोप पर बहुत कम समय में हमला कर सकती है। बराक ओबामा ने भी अपने कार्यकाल में 2014 में यह मुद्दा उठाया था। परन्तु रूस ने इन आरोपों को ख़ारिज किया तथा अमेरिका पर यूरोप में मिसाइल सिस्टम स्थापित करने का आरोप लगाया।

परिणाम

अमेरिका द्वारा संधि से बाहर के बाद अब अमेरिका प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभुत्व को कम करने के लिए नए परमाणु हथियारों का विकास कर सकता है। इस संधि के बाद रूस और अमेरिका में फिर से हथियारों की दौड़ की शुरू हो सकती है।

 

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