शरद अरविन्द बोबडे

देश के अगले मुख्य न्यायधीश के लिए जस्टिस बोबडे के नाम की अनुशंसा की गयी

भारत के मौजूदा मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई ने देश के अगले मुख्य न्यायधीश के लिए जस्टिस बोबडे के नाम की अनुशंसा की है। जस्टिस गोगोई 17 नवम्बर, 2019 को सेवानिवृत्त होंगे, उन्होंने 3 अक्टूबर, 2018 को भारत के 46वें मुख्य न्यायधीश के रूप में शपथ ली थी।

प्रक्रिया के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायधीश को मुख्य न्यायधीश नियुक्त किया जाता है। सेवानिवृत्त होने वाले मुख्य न्यायधीश अगले मुख्य न्यायधीश के नाम की अनुशंसा विधि मंत्री को भेजते हैं। विधि मंत्री इस नाम को प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत करते हैं और वे राष्ट्रपति से इस पर विचार-विमर्श करते हैं।

जस्टिस बोबडे

शरद अरविन्द बोबडे मौजूदा समय में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीश हैं। वे मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश हैं। वे 23 अप्रैल, 2021 में सेवानिवृत्त होंगे। वे नागपुर से हैं। उनके दादाजी एक वकील तथा उनके पिताजी अरविन्द बोबडे महाराष्ट्र में एक अधिवक्ता थे। शरद अरविन्द बोबडे के बड़े भाई विनोद अरविन्द बोबडे एक संवैधानिक विशेषज्ञ तथा सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील थे।

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जस्टिस एस. ए. बोबडे को नालसा का कार्यकारी चेयरमैन नामित किया गया

जस्टिस शरद अरविन्द बोबडे को भारतीय राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) के कार्यकारी चेयरमैन के लिए मनोनीत किया गया। उन्हें नियुक्त करने के लिए राष्ट्रपति ने लीगल अथॉरिटीज एक्ट, 1987 के सेक्शन 3 के सब-सेक्शन (3) के क्लॉज़ (बी) का उपयोग किया जायेगा। वे जस्टिस ए.के. सिकरी की जगह लेंगे, जस्टिस सिकरी 6 मार्च को सेवानिवृत्त होंगे।

भारतीय राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा)

नालसा कस्टडी में व्यक्ति को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाता है। इसका गठन लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट, 1987 के तहत की गयी थी। यह नागरिक तथा आपराधिक मामलों में निर्धन व्यक्तियों को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध करवाता है। यह विवादों के मैत्रीपूर्ण तथा शीघ्र समाधान के लिए लोक अदालत का आयोजन भी करता है। नालसा की प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • संविधान के अनुच्छेद 39 A में समाज के कमज़ोर तबकों के लिए निशुल्क कानूनी सहायता की व्यवस्था है, इस प्रावधान को पूर्ण करने के लिए नालसा अस्तित्व में आया था।
  • विवादों के मैत्रीपूर्ण समाधान के लिए नालसा लोक अदालतों का आयोजन करता है।
  • नालसा का एक अन्य कार्य कानूनी साक्षरता तथा जागरूकता फैलाना भी है।
  • भारत के मुख्य न्यायधीश नालसा के पैट्रन-इन-चीफ के रूप में कार्य करते हैं, जबकि सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायधीश इस प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष होते हैं।

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