शिंजों आबे

सिस्टर सिटी पार्टनरशिप : अहमदाबाद तथा कोबे के बीच LoI का आदान-प्रदान किया गया

अहमदाबाद तथा कोबे (जापान का शहर) के बीच सिस्टर सिटी पार्टनरशिप के लिए LoI (लैटर ऑफ़ इंटेंट) का आदान-प्रदान किया गया। इससे दोनों शहरों के बीच आर्थिक व सांस्कृतिक सम्बन्ध मज़बूत होंगे। यह आदान-प्रदान भारतीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थति में किया गया, श्री मोदी ने कोबे में भारतीय समुदाय के लोगों को भी संबोधित किया।

सिस्टर सिटी क्या है?

यह दो देशों, शहरों, प्रान्तों अथवा क्षेत्रों के बीच एक कानूनी व सामाजिक समझौता होता है, इसका उद्देश्य सांस्कृतिक तथा व्यापारिक संबंधों को बढ़ावा देना होता है। यह योजना द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए शुरू की गयी थी। कूटनीति में सिस्टर सिटी के कांसेप्ट को दो देशों के बीच सामरिक संबंधों को मज़बूत करने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।

भारत ने अब तक चीन, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, दक्षिण कोरिया, रूस, कनाडा, जर्मनी, बेलारूस, मॉरिशस, हंगरी, जॉर्डन, बांग्लादेश, लिथुआनिया तथा पुर्तगाल के साथ सिस्टर सिटी समझौते किये हैं।

पृष्ठभूमि

नवम्बर, 2016 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने गुजरात तथा जापान के हयोगो प्रीफेक्चर के लिए सिस्टर स्टेट समझौते पर हस्ताक्षर किये थे।  कोबे, हयोगो की राजधानी है। उस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कोबे में बुलेट ट्रेन प्लांट की यात्रा भी की थी। उस समझौते का उद्देश्य गुजरात तथा हयोगो के बीच शिक्षा, संस्कृति, व्यापार, पर्यावरण सुरक्षा तथा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में सहयोग को बढ़ावा देना था।

भारत-जापान सम्बन्ध

भारत और जापान विभिन्न क्षेत्रों तथा परियोजनाओं में मिलकर कार्य कर रहे हैं। भारतीय मूल के काफी लोग जापान में कार्य करते हैं। भारत और जापान कार से लेकर बुलेट ट्रेन मिलकर बनाने जा रहे हैं।

गौरतलब है कि भारत की पहली बुलेट ट्रेन मुंबई और अहमदाबाद के बीच जापान की सहायता से चलायी जाएगी। इस महत्वकांक्षी परियोजना का पहला हिस्सा 2022 में पूरा हो जायेगा।

 

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केन्द्रीय कैबिनेट ने जापान के साथ करेंसी स्वैप के समझौते को मंज़ूरी दी

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने जापान के साथ 75 अरब डॉलर के करेंसी स्वैप समझौते को मंज़ूरी दे दी है। यह समझौते भारत-जापान आर्थिक संबंधों में एक मील का पत्थर है। इससे दोनों देशों के बीच आर्थिक व सामरिक सहयोग में वृद्धि होगी।

करेंसी स्वैप समझौता (मुद्रा विनिमय) क्या है?

करेंसी स्वैप समझौता एक विदेशी विनिमय समझौता है यह दो पक्षों के बीच में एक मुद्रा के बदले दूसरी मुद्रा के लिए एक निश्चित समय तक के लिए किया जाता है।

यह समझौता भारत के लिए किस प्रकार लाभदायक है?

  • करेंसी स्वैप (मुद्रा विनिमय) से भारत को आयात का भुगतान करने में आसानी होगी। इससे अवमूल्यन की समस्या भी दूर हो जाएगी।
  • चूंकि मुद्रा विनिमय में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार किया जाता है। दोनों देशों आयात व निर्यात के लिए अपनी मुद्राओं से भुगतान करते हैं। इससे तीसरे पक्ष की मुद्रा की आवश्यकता नहीं पड़ती तथा मुद्रा विनिमय पर व्यय नहीं करना पड़ता।
  • मुद्रा विनिमय से तरलता को बेहतर बनाने में सहायता मिलती है।
  • मुश्किल समय के लिए मुद्रा विनिमय काफी उपयोगी होता है।
  • मुद्रा विनिमय से देश का भुगतान शेष भी स्थिर होता है।

इस मुद्रा विनिमय समझौते पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा जापानी प्रधानमंत्री शिंजो आबे के बीच पिछले वर्ष अक्टूबर में सहमती बनी थी।

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