संयुक्त राष्ट्र महासभा

17 जून : विश्व मरुस्थलीकरण व सूखा रोकथाम दिवस

प्रतिवर्ष 17 जून को विश्व मरुस्थलीकरण व सूखा रोकथाम दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार मरुस्थलीकरण से अभिप्राय शुष्क तथा अर्ध-शुष्क क्षेत्र में भूमि के निम्नीकरण से है।

मुख्य बिंदु

विश्व मरुस्थलीकरण तथा सूखा रोकथाम दिवस की घोषणा 30 जनवरी, 1995 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा प्रस्ताव A/RES/49/115 के द्वारा की गयी थी। इस वर्ष विश्व मरुस्थलीकरण व सूखा रोकथाम दिवस की थीम “लेट्स ग्रो द फ्यूचर टूगेदर” है।

इस दिवस का उद्देश्य लोगों में मरुस्थलीकरण तथा सूखे के बारे में जागरूकता फैलाना है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार प्रतिवर्ष 24 अरब टन उपजाऊ भूमि शुष्क हो रही है, शुष्क क्षेत्र निम्नीकरण के कारण विकासशील देशों के राष्ट्रीय घरेलु उत्पाद में 8% की कमी आ रही है।

मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए भारत के प्रयास

भारत सरकार द्वारा मरुस्थलीकरण को रोकने के लिए कई योजनाये चलायी जा रही हैं – पर ड्रॉप मोर क्रॉप, साइल हेल्थ कार्ड स्कीम तथा किसानों के लिए नीम कोटित यूरिया, इससे कृषि योग्य भूमि में विस्तार होगा।

पिछले पांच वर्षों में भारत के वन क्षेत्र में वृद्धि हुई है। भारत सरकार किसानों के कल्याण तथा पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

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विश्व निवेश रिपोर्ट 2019 : मुख्य बिंदु

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र व्यापार व विकास कन्वेंशन (UNCTAD) ने विश्व निवेश रिपोर्ट 2019 जार की, इस रिपोर्ट के अनुसार 2018 में भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 6% की वृद्धि हुई। भारत 2017-18 में विश्व के सबसे अधिक प्रत्यक्ष निवेश प्राप्त करने वाले टॉप 20 देशों की सूची में शामिल है।

मुख्य बिंदु

भारत में 2018 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 6% की वृद्धि हुई और भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश 42 अरब डॉलर पर पहुंचा। यह प्रत्यक्ष विदेशी निवेश विनिर्माण, वित्तीय सेवा सेक्टर, संचार तथा अधिग्रहण इत्यादि क्षेत्रों में सर्वाधिक किया गया।

दक्षिण एशिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश : दक्षिण एशिया में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 3.5% की वृद्धि हुई और यह 54 अरब डॉलर पर पहुंचा। दक्षिण एशिया क्षेत्र में 70 से 80% प्रत्यक्ष विदेशी निवेश भारत में किया जाता है। श्रीलंका में 1.6 अरब डॉलर तथा बांग्लादेश में 3.6 अरब डॉलर प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ। पाकिस्तान में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में 27% की कमी आई और यह 2.4 अरब डॉलर पर पहुंचा गया।

संयुक्त राष्ट्र व्यापार व विकास कन्वेंशन (UNCTAD)

इसकी स्थापना 1964 में एकीकृत व्यापार व विकास के उद्देश्य से की गयी थी। यह संयुक्त राष्ट्र महासभा का अंग है। वर्तमान में इसमें 195 सदस्य हैं। इसका प्रमुख कार्य विकासशील देशों में व्यापार, निवेश तथा विकास अवसरों को बढ़ावा देना है।

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