संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम

GCF ने भारत के तटीय क्षेत्रों में जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए 43 मिलियन डॉलर की राशि को मंज़ूरी दी

ग्रीन क्लाइमेट फण्ड (GCF) ने भारत के तटीय क्षेत्रों में निवास करने वाले समुदायों द्वारा जलवायु परिवर्तन का सामना करने के लिए 43.4 मिलियन डॉलर की राशि को मंज़ूरी दे दी है।  इस राशि का उपयोग विभिन्न देशों में भू-तापीय उर्जा तथा तटीय समुदायों के संरक्षण इत्यादि के लिए किया जायेगा।

मुख्य बिंदु

GCF द्वारा फण्ड किया जाने वाला यह प्रोजेक्ट बहु-आयामी है, इस प्रोजेक्ट के तहत आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र तथा ओडिशा के संवेदनशील इलाकों पर फोकस किया जायेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत इन राज्यों को जलवायु परिवर्तन के मुताबिक समुदायों को ढालने तथा उत्सर्जन में कमी करने के लिए कार्य किया जायेगा। इसके अलावा स्थानीय समुदाय की आजीविका के लिए भी व्यवस्था की जाएगी। यह प्रोजेक्ट को संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) के द्वारा भी सहायता दी जाएगी। इस प्रोजेक्ट के तहत 15,000 हेक्टेयर क्षेत्र में मंग्रोव, कोरल रीफ, सीग्रास तथा नमक युक्त दलदल के संरक्षण के लिए कार्य किया जायेगा। इसके लिए स्थानीय युवाओं को वैज्ञानिकों के साथ कार्य करने के लिए प्रशिक्षण दिया जायेगा।

इसके अलावा इस कार्य में समन्वय के लिए सरकारी अफसरों, शैक्षणिक संस्थानों, सामुदायिक नेताओं तथा वैज्ञानिकों के लिए मोबाइल एप्प का निर्माण किया जायेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण तथा जन शिक्षा कार्यक्रम के द्वारा को जलवायु परिवर्तन तथा इसके खतरों से भी अवगत करवाया जायेगा।

प्रोजेक्ट का महत्व

इस प्रोजेक्ट के द्वारा स्थानीय समुदाय को जलवायु के अनुकूल अजीविका के साधन प्राप्त होंगे तथा इससे ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी आएगी। इकोसिस्टम (उपरोक्त वर्णित कार्य) के द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 3.5 मिलियन टन की कमी आएगी। इससे पारिस्थितिकी तंत्र को भी दीर्घकाल में लाभ होगा। यह पेरिस समझौते तथा 2030 सतत विकास अजेंडे के लक्ष्यों को प्राप्त करने में काफी सहायक सिद्ध होगा।

पृष्ठभूमि

भारत के तटवर्ती क्षेत्र जलवायु परिवर्तन की दृष्टि से काफी संवेदनशील हैं। भारत की तटरेखा जलवायु परिवर्तन से सर्वाधिक प्रभावित क्षेत्रों में से एक है।बंगाल की खाड़ी तथा अरब सागर में इसका काफी असर पड़ेगा, इन क्षेत्रों में विपरीत मौसमी परिस्थितियां जैसे चक्रवात इत्यादि की प्रवृत्ति काफी बढ़ जाएगी। भारत में लगभग 6,740 वर्ग किलोमीटर का मंग्रोव क्षेत्र है। कुछ क्षेत्रों में मंग्रोव में मानवीय गतिविधियों के कारण 50% की कमी आ गयी है, जलस्तर के बढ़ जाने के कारण इसमें और कमी होने की सम्भावना है।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , ,

विश्व जनसँख्या दिवस : 11 जुलाई

11 जुलाई को पूरे विश्व में लोगों के बीच जनसँख्या से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता बढ़ाने के उदेश्य से विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है। इस दिवस के बहुआयामी उद्देश्यों में लिंग भेद, लिंग समानता, परिवार नियोजन आदि के साथ महिलाओं के गर्भधारण सम्बन्धी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए लोगों को जागरूक करना भी शामिल है।

मुख्य तथ्य

वर्ष 1989 में संयुक्त राष्ट्र ने सबसे पहले 11 जुलाई को विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाये जाने की घोषणा की थी। वर्तमान समय में सम्पूर्ण विश्व की जनसंख्या 720 करोड़ तक पहुंच चुकी है, जो कि हर दिन तेजी से बढ़ती जा रही है। बढ़ती आबादी से जुड़ी विभिन्न समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने के उदेश्य से ही प्रत्येक वर्ष 11 जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ के रूप में आयोजित किया जाता है। विश्व की 720 करोड़ की आबादी में से लगभग 132.4 करोड़ व्यक्ति भारत में ही निवास करते है। विश्व की जनसँख्या में प्रतिवर्ष 83 मिलियन की वृद्धि हो रही है।

विश्व बैंक में कार्यरत डॉ के सी ज़कारिया ने सम्पूर्ण विश्व की आबादी पांच अरब होने की स्थिति में यह दिवस मनाने का सुझाव भी दिया था। इस दिवस की स्थापना 1989 में संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की गवर्निंग कौंसिल द्वारा की गयी थी।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , ,

Advertisement