संसद

मणिपुर में देश के पहले राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना से जुड़े अध्यादेश को मंजूरी दी गई

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इम्फाल (पश्चिम) मणिपुर में देश के पहले राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना हेतु एक अध्यादेश को मंजूरी दे दी है। यह नियम राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय विधेयक, 2017 की तर्ज पर है जो संसद में लंबित है (अगस्त, 2017 में लोकसभा में इसे पेश किया गया था)।

मुख्य तथ्य

यह विशेष विश्वविद्यालय देश में अपनी तरह का पहला विश्वविद्यालय होगा जो सर्वोत्तम अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं (international practices) को अपनाएगा। मणिपुर सरकार ने प्रस्तावित विश्वविद्यालय के लिए भूमि आवंटित कर दी है। मणिपुर में राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रस्ताव शुरू में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषित किया था। यह 2014-15 के बजट में 100 करोड़ रुपये आवंटन के साथ अनुमोदित किया गया था। प्रस्तावित विश्वविद्यालय से खेल विज्ञान, खेल प्रौद्योगिकी, उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में देश के खेल पर्यावरण में मौजूद अंतर को कम करने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय खेल विश्वविद्यालय के उद्देश्य

o शारीरिक शिक्षा और खेल विज्ञान में अनुसंधान, विकास और प्रसार करना ।
o शारीरिक शिक्षा और खेल प्रशिक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ करना।
o विभिन्न स्तरों पर ज्ञान क्षमता, कौशल तथा योग्यता को विस्तारित करने का काम करना।
o अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एथलीटों को विकसित होने में उनकी मदद करने हेतु प्रतिभाशाली एथलीटों को प्रशिक्षण देना।

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केंद्रीय सतर्कता आयोग : भ्रष्टाचार से जुड़ी सबसे अधिक शिकायतें रेलवे और सार्वजनिक बैंकों के खिलाफ मिलीं

केंद्रीय सतर्कता आयोग की रिपोर्ट के अनुसार बीते साल उसे भ्रष्टाचार से जुड़ी सबसे अधिक शिकायतें रेलवे और सार्वजनिक बैंकों के खिलाफ मिलीं। 2017 में सालाना रिपोर्ट के अनुसार आयोग को मिलने वाली शिकायतों में 2016 की तुलना में 52 प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।

मुख्य तथ्य

o संसद में पेश रिपोर्ट के अनुसार आयोग को 2017 में कुल 23,609 शिकायतें मिलीं जो कि 2011 के बाद सबसे कम है। वर्ष 2016 में आयोग को 49,847 शिकायतें मिली थीं।
o आयोग को राज्य सरकारों व अन्य संगठनों में काम कर रहे लोकसेवकों के खिलाफ भी अनेक शिकायतें मिलीं, जो कि आयोग के अधिकार क्षेत्र में नहीं आते या प्रशासनिक प्रकृति के हैं।
o आयोग को 2015 में भ्रष्टाचार की 29,838 शिकायतें मिलीं। इससे पहले 2012 में यह संख्या 37,039 जबकि 2013 में 31,432 और 2014 में 62,362 रही।
o 2011 में आयोग को भ्रष्टाचार की 16,929 शिकायतें मिली थीं। सीधे केंद्रीय सतर्कता आयोग को भेजी गई शिकायतों के अलावा 2017 में 57,000 से ज्यादा शिकायतें तमाम विभागों के मुख्य सतर्कता अधिकारियों को भेजी गईं।
o रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार की सबसे ज्यादा 12,089 शिकायतें मिलीं। इनमें से 9,575 का निपटारा कर दिया गया है जबकि 2,514 शिकायतें अभी लंबित हैं।
o रेलवे कर्मचारियों के खिलाफ कुल 1,037 ऐसी शिकायतें हैं जो 6 महीने से ज्यादा वक्त से लंबित हैं। दिल्ली जल बोर्ड, नॉर्थ, ईस्ट और साउथ दिल्ली के निकायों व एनडीएमसी जैसे स्थानीय निकायों के खिलाफ भ्रष्टाचार की कुल 8,243 शिकायतें मिलीं।

केंद्रीय सतर्कता आयोग

यह एक शीर्ष भारतीय निकाय है जिसकी स्थापना 1964 में केंद्र सरकार के तहत सरकारी भ्रष्टाचार की पहचान व सतर्कता निगरानी करने के लिए और केंद्र सरकार की संस्थाओं में योजना बनाने, क्रियान्वित करने तथा उनकी सतर्कता की समीक्षा करने में विभिन्न अधिकारियों को सलाह देने के लिए की गयी थी। एक स्वायत्त निकाय का दर्जा इसे प्राप्त है।

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