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संसद ने पारित किया दिवालिया और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) बिल, 2018

संसद ने दिवालिया और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) बिल, 2018 पारित किया। इसका उद्देश्य कंपनियों व लोगों की दिवालियापन की प्रक्रिया का समयबद्ध तरीके से करना है। दिवालियापन वह स्थिति है जब जब कोई कंपनी अथवा व्यक्ति अपने ऋण का भुगतान करने की स्थिति में नहीं होता। सरकार ने नवम्बर, 2017 में दिवालियापन कानून समिति का गठन किया था। इस समिति द्वारा कई सुझाव प्रस्तुत किये गये थे। इसके बाद जून 2018 में दिवालियापन और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) अध्यादेश राष्ट्रपति द्वारा लागू किया गया था।

मुख्य बिंदु

इस बिल में रियल एस्टेट के संबध में आबंटी की स्थिति को स्पष्ट किया गया है, इसके अनुसार निर्माणाधीन भवन इत्यादि के क्रेता को वित्तीय लेनदार माना जायेगा। इस विधेयक से सूक्ष्म, लघु तथा मध्यम उद्योगों व घर लेने वाले लोगों को राहत देने का प्रयास किया जायेगा।

इस बिल में किसी वर्ग से ऋण लेने पर वित्तीय लेनदारों का प्रतिनिधित्व लेनदारों की एक समिति द्वारा किया जायेगा। यह प्रतिनिधि वित्तीय लेनदारों की ओर से वोट करेंगे। इसके अलावा लेनदारों की समिति की वोट की सीमा 75% से कम करके 51% प्रतिशत कर दी गयी है।

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संसद ने पारित किया केन्द्रीय होमियोपैथी परिषद् (संशोधन) बिल, 2018

संसद ने केन्द्रीय होमियोपैथी परिषद् (संशोधन) बिल, 2018 पारित किया। यह बिल मई, 2018 में राष्ट्रपति द्वारा जारी किये गए अध्यादेश का स्थान लेगा। इस बिल के द्वारा केंद्रीय होमियोपैथी परिषद् अधिनियम, 1973 में संशोधन किया गया है। इसके द्वारा देश में होमियोपैथी की शिक्षा इत्यादि को संचालित किया जाता है।

मुख्य बिंदु

केन्द्रीय परिषद् का अधिक्रमण  : इस बिल के द्वारा केन्द्रीय होमियोपैथी परिषद् अधिनियम, 1973 का अधिक्रमण किया गया। यह अधिनियम मई, 2018 से लागू माना जायेगा। अधिक्रमण के एक वर्ष के भीतर केन्द्रीय परिषद् का पुनर्गठन किया जायेगा। अंतरिम समयकाल के लिए केन्द्रीय परिषद् की शक्तियों का उपयोग बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स द्वारा किया जायेगा।

बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स : बोर्ड ऑफ़ गवर्नर्स में अधिकतम 7 सदस्य हो सकते हैं। इनकी नियुक्ति केन्द्र सरकार द्वारा की जाती है। सदस्यों में से ही किसी एक को सरकार द्वारा अध्यक्ष चुना जायेगा। नीति निर्णय के सम्बन्ध में केंद्र सरकार का फैसला ही अंतिम होगा।

पहले से चल रहे होमियोपैथी कॉलेज से लिए अनुमति : इस बिल के अनुसार यदि अध्यादेश से पूर्व,  पहले से चल रहा कोई होमियोपैथी मेडिकल कॉलेज अथवा कोई मेडिकल नए कोर्स शुरू करना चाहता है तो उसे केंद्र सरकार से एक वर्ष के भीतर अनुमति प्राप्त करनी होगी। यदि एक साल के भीतर मेडिकल कॉलेज आवश्यक अनुमति नहीं लेता है तो उस कॉलेज द्वारा दी गयी डिग्री इत्यादि मान्य नहीं होगी।

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