सऊदी अरब

भारत ने G-20 वर्चुअल व्यापार और निवेश मंत्रियों की बैठक में भाग लिया

केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से  दूसरी जी-20 वर्चुअल व्यापार व निवेश मंत्रियों की बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व किया।

मुख्य बिंदु

इस वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग को G20 समूह के वर्तमान अध्यक्ष सऊदी अरब द्वारा आयोजित किया गया था। अप्रैल 2020 से सऊदी अरब ने COVID-19 खतरों, नियंत्रण उपायों और वायरस द्वारा उत्पन्न आर्थिक चुनौती पर चर्चा करने के लिए इस तरह के आभासी शिखर सम्मेलन की एक श्रृंखला की मेजबानी की है।

इस बैठक में मंत्री महत्वपूर्ण चिकित्सा आपूर्ति और सीमाओं के पार अन्य आवश्यक वस्तुओं के प्रवाह को सुनिश्चित करने पर काम करने के लिए सहमत हुए। वे मुक्त, गैर-भेदभावपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी व्यापार और निवेश वातावरण उपलब्ध करवाने के लिए भी सहमत हुए। वे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को कार्यशील रखने पर भी सहमत हुए।

COVID-19 संकट के कारण आज जो हर देश खाद्य कीमतों में अत्यधिक अस्थिरता का सामना करना पड़ रहा है। इससे खाद्य सुरक्षा को भी खतरा है। G-20 मंत्रियों ने बैठक में इस मुद्दे पर काम करने पर सहमति व्यक्त की।

पृष्ठभूमि

30 मार्च को G-20 नेताओं ने एक “समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया” की आवश्यकता पर सहमति व्यक्त की थी। समन्वित वैश्विक प्रतिक्रिया के तहत किए गए कार्यों को लागू करने के लिए ऊर्जा, श्रम, रोजगार, कृषि, पर्यटन और डिजिटल अर्थव्यवस्था पर बैठकें आयोजित की गईं।

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अमेरिका ने अपने बौद्धिक संपदा ढांचे में पर्याप्त सुधार की कमी के लिए भारत सहित 10 देशों को ‘प्राथमिकता निगरानी सूची’ में रखा

अमेरिका ने अपने बौद्धिक संपदा ढांचे में पर्याप्त सुधार की कमी के लिए भारत सहित 10 देशों को ‘प्राथमिकता निगरानी सूची’ में रखा है। अमेरिका ने इस सूची में भारत और चीन सहित 10 देशों को रखा है, और आरोप लगाया कि बौद्धिक सम्पदा का प्रवर्तन कमजोर हो गया है या उन देशों में अपर्याप्त है। अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि कमजोर बौद्धिक सम्पदा प्रवर्तन के कारण अमेरिकियों को एक समान बाजार पहुंच प्राप्त करने में कठिनाई होती है।

सूची में रखे गए अन्य देशों में अर्जेंटीना, अल्जीरिया, चिली, रूस, इंडोनेशिया, सऊदी अरब, वेनेजुएला और यूक्रेन शामिल हैं। इस सूची से हटाए गए देशों में कनाडा, कुवैत और थाईलैंड शामिल थे।

मुख्य बिंदु

अमेरिका के अनुसार, भारत में बौद्धिक सम्पदा सम्बन्धी चुनौतियां अमेरिकी कंपनियों को देश में पेटेंट प्राप्त करने, बनाए रखने और लागू करने के लिए मुश्किल उत्पन्न करती हैं। यह मुख्य रूप से दवा उद्योगों में प्रचलित है। अमेरिका ने यह भी शिकायत की है कि भारत में फार्मास्युटिकल मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस के मामले में अधिक पारदर्शिता नहीं है। प्रमुख मुद्दों में ऑनलाइन पायरेसी, ट्रेडमार्क की रक्षा के लिए बाधाएं, नकली सामानों का निर्यात, उच्च-मात्रा निर्माण इत्यादि शामिल हैं।

बौद्धिक सम्पदा

विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार संगठन के अनुसार, बौद्धिक संपदा साहित्यिक और कलात्मक कार्यों, प्रतीकों, नामों, छवियों का निर्माण है। चार मुख्य बौद्धिक संपदा अधिकारों में आविष्कार, भौगोलिक संकेत, ट्रेडमार्क और औद्योगिक डिजाइन शामिल हैं।

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