सऊदी अरब

सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने लांच की साझा डिजिटल करेंसी अबेर

हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात और सऊदी अरब के केन्द्रीय बैंकों ने “अबेर” नामक साझा डिजिटल मुद्रा को लांच किया। इस डिजिटल मुद्रा का उपयोग दोनों देशों के बीच ब्लॉकचेन तथा डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर टेक्नोलॉजी के बीच वित्तीय भुगतान के लिए किया जायेगा।

डिजिटल मुद्रा के लाभ

इस डिजिटल मुद्रा के द्वारा वित्तीय विनिमय के लिए एक और विकल्प होगा। शुरू में इस मुद्रा का उपयोग सीमित बैंकों में किया जायेगा। इस मुद्रा की तकनीकी, आर्थिक तथा कानूनी आवश्यकता का अध्ययन करने के बाद इस मुद्रा के उपयोग का विस्तार किया जायेगा।

डिजिटल मुद्रा अबेर केन्द्रीय बैंक तथा अन्य बैंकों के बीच डिस्ट्रिब्यूटेड डाटा के उपयोग पर निर्भर है। यह ब्लॉकचेन पर आधारित होती है।

ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी

ब्लॉकचेन एक प्रकार का डिजिटल बही खाता है, इसमें डाटा क्लाउड में सुरक्षित रखा जाता है। यह डाटा स्टोरेज की सुरक्षित प्रणाली है। इसमें डाटा को कॉपी किये बिना विकेंद्रीकृत किया जाता है। यह काफी सुरक्षित व पारदर्शी है। इस टेक्नोलॉजी का उपयोग क्रिप्टोकरेंसी में बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसके अलावा वित्तीय लेन-देन, क्राउड-फंडिंग, गवर्नेंस, फाइल स्टोरेज और इन्टरनेट ऑफ़ थिंग्स इत्यादि में इसका उपयोग किया जाता है।

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सऊदी अरब ने की लापता पत्रकार जमाल खाशोज्जी की हत्या की पुष्टि

सऊदी अरब ने 2 अक्टूबर, 2018 से लापता पत्रकार जमाल खाशोज्जी की हत्या की पुष्टि कर दी है। उनकी हत्या तुर्की के इस्तांबुल में सऊदी अरब के दूतावास में की गयी। दरअसल खाशोज्जी 2 अक्टूबर, 2018 को इस्तांबुल (तुर्की) में सऊदी अरब के दूतावास गए थे, परन्तु  उसके बाद वे उस भवन से बाहर नहीं आये। तुर्की की पुलिस द्वारा उनकी हत्या की आशंका जताई गयी है। खाशोज्जी के मुद्दे पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी विवाद चल रहा था।

पृष्ठभूमि

जमाल खाशोज्जी सऊदी अरब में पत्रकारिता का कार्य करते थे, वे अल-अरब न्यूज़ चैनल के एडिटर-इन-चीफ तथा अल वतन अख़बार के एडिटर के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने सऊदी अरब की सरकार की आलोचना करते हुए कई लेख लिखे। वे सऊदी अरब के राजकुमार मोहम्मद बिन सलमान तथा देश के शासक किंग सलमान के आलोचक थे। उन्होंने यमन में सऊदी अरब के हस्तक्षेप का भी विरोध किया था।

जमाल खाशोज्जी

जमाल खाशोज्जी का जन्म 13 अक्टूबर, 1958 को सऊदी अरब के मदीना में हुआ था। वे एक स्तंभकार, पत्रकार व लेखक हैं। उन्होंने अल-अरब न्यूज़ चंनल तथा अल वतन अखबार में कार्य किया है। खाशोज्जी ने सितम्बर, 2017 में सऊदी अरब को छोड़ा था।

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