सर्जिकल स्ट्राइक

सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगाँठ को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया

सर्जिकल स्ट्राइक की दूसरी वर्षगाँठ 29-30 सितम्बर, 2018 को भारतीय सेना द्वारा पराक्रम दिवस के रूप में मनाया गया। 29 सितम्बर, 2016 भारतीय सेना ने पाक अधीकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक करके अपनी वीरता का परिचय दिया था।

उत्सव

पराक्रम उत्सव का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राजस्थान के जोधपुर में कंबाइंड कमांडर्स कांफ्रेंस में किया गया। जोधपुर मिलिट्री स्टेशन में कोणार्क कोर द्वारा भारतीय सेना की उपलब्धियों तथा साहसिक कार्यों को रेखांकित किया गया।

पृष्ठभूमि

भारतीय सेना ने 28-29 सितम्बर, 2016 को पाक अधिकृत कश्मीर में रात्री में सर्जिकल स्ट्राइक की थी। इससे 11 दिन पहले उड़ी में 18 भारतीय सैनिकों की हत्या की गयी थी। इस सर्जिकल स्ट्राइक को पैरा (स्पेशल फोर्सेज) आमतौर पर पैरा SF के नामे से जाने वाली यूनिट (भारतीय सेना की पैराशूट रेजिमेंट की विशेष यूनिट) द्वारा अंजाम दिया गया। चार घंटे तक चली इस सर्जिकल स्ट्राइक में आतंकवादियों तथा उनके संरक्षकों को भारी जान-माल का नुकसान हुआ। इस सर्जिकल स्ट्राइक को पाकिस्तान सीमा के निकट आंतकवादियों के बेस कैम्प पर किया गया, जो भारत में घुसपैठ की फिराक में थे। यह पाकिस्तानी सीमा पर इस प्रकार की पहली सर्जिकल स्ट्राइक थी। इससे पहले भारत म्यांमार में ऐसी सर्जिकल स्ट्राइक कर चुका है।

सर्जिकल स्ट्राइक

सर्जिकल स्ट्राइक में एक सीमित क्षेत्र में तीव्रता से हमला किया जाता है, इस दौरान सार्वजनिक अधोसरंचना, वाहनों, भवनों तथा नागरिक को नुकसान नहीं पहुँचाया जाता। सर्जिकल स्ट्राइक के द्वारा दुश्मन को समाप्त करने से दो देशों के बीच बड़े देशों की सम्भावना बहुत कम रह जाती है। भारत के दृष्टिकोण से यह सर्जिकल स्ट्राइक घुसपैठ को रोकने के लिए आवश्यक थी।

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