सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या विवाद पर अपना फैसला सुनाया

सर्वोच्च न्यायालय ने अयोध्या राम जन्म भूमि-बाबरी बस्जिद भूमि विवाद मामले पर अपना निर्णय सुनाया। निर्णय से पहले देश भर में सुरक्षा को मज़बूत किया गया। उत्तर प्रदेश, दिल्ली तथा अन्य कई राज्यों में धारा 144 लागू की गयी। कई स्थानों पर स्कूलों तथा अन्य शिक्षण संस्थानों को बंद रखा गया।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

सर्वोच्च न्यायालय ने 5 एकड़ की विवादित भूमि पर राम मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार को सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए किसी अन्य स्थान पर पांच एकड़ भूमि प्रदान करने का आदेश दिया है।

यह निर्णय भारत के मुख्य न्यायधीश जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में पांच न्यायाधीशों वाली पीठ ने सुनाया। इस पीठ में जस्टिस अशोक भूषण, एस.ए. बोबड़े, डी. वाई. चंद्रचूड़ तथा एस. अब्दुल नजीर शामिल है। इस फैसले का समर्थन पाँचों न्यायधीशों ने किया है।

अयोध्या भूमि विवाद की टाइमलाइन

1885 : महंत रघुबर दास ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण के लिए प्रथम मुकद्दमा दायर किया।

1949 : बाबरी मस्जिद के अन्दर भगवान् श्री राम की मूर्तियाँ पायी गयीं।

1950 से 1950 के बीच हिन्दू तथा मुस्लिम संगठनों ने 5 अन्य मुकद्दमे दायर किये।

1992 : दक्षिणपंथी कार्यकर्ताओं ने बाबरी मस्जिद को नष्ट किया।

2010 : इलाहबाद उच्च न्यायालय ने विवादित भूमि को तीन पार्टियों – निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी वक्फ बोर्ड तथा राम लल्ला में विभाजित किया था।

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स्कूल में प्रवेश के लिए आधार अनिवार्य नहीं : UIDAI

हाल ही में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने यह स्पष्ट कर दिया है की स्कूल एडमिशन के लिए आधार को अनिवार्य नहीं बना सकते। UIDAI के अनुसार स्कूल में एडमिशन के लिए आधार कार्ड की मांग नियम के प्रावधान के अनुकूल नहीं है और ऐसा करना हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी किये गये आदेश के विरुद्ध होगा।

UIDAI ने स्कूलों से यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि कोई भी बच्चा आधार न होने के कारण एडमिशन से वंचित न रहे। UIDAI ने स्कूलों को आधार के बिना बच्चों का एडमिशन करवाने के कहा है, बाद में स्कूलों में विशेष कैंप के दौरान बच्चों का आधार कार्ड बनवाया जा सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय

सर्वोच्च न्यायालय ने अपने निर्णय में आधार की मान्यता को बरकरार रखा था और इस बात पर विशेष बल दिया था कि स्कूलों में एडमिशन के लिए आधार को अनिवार्य न बनाया जाए। इसके अलावा सीबीएसई, NEET तथा UGC इत्यादि के लिए भी आधार को अनिवार्य न बनाने की बात कही गयी थी।

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