सर्वोच्च न्यायालय

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र की गवाह सुरक्षा योजना को मंज़ूरी दी

देश के सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की गवाह सुरक्षा योजना 2018 को मंज़ूरी दे दी है तथा केंद्र व राज्यों को इस योजना के क्रियान्वयन के लिए निर्देश भी दिए हैं। इस योजना का निर्माण केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने गवाहों की सुरक्षा के लिए डाली गयी एक जनहित याचिका के बाद किया है।

मुख्य बिंदु

सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार यह योजना संविधान के अनुच्छेद 141/142 के तहत कानून बन सकती है। सर्वोच्च न्यायालय ने राज्यों तथा केंद्र शासित प्रदेशों को एक वर्ष के भीतर Vulnerable  Witness Deposition Complex (VWDC) स्थापित करने होंगे। इसका मुख्य कारण यह है कि काफी बड़ी संख्या में गवाह स्वयं तथा परिवार की सुरक्षा न होने के कारण गवाही नहीं दे पाते। इसलिए न्यायिक प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने के लिए गवाहों को सुरक्षा प्रदान की जानी आवश्यक है।

गवाह सुरक्षा योजना 2018

इस योजना का निर्माण केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने 18 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, 5 राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों, पुलिस तथा तीन उच्च न्यायालयों से इनपुट प्राप्त करने के बाद किया। राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (नालसा) से विचार-विमर्श बाद इस योजना को अंतिम रूप दिया गया।

इस योजना का उद्देश्य गवाहों को सुरक्षा प्रदान करना है ताकि निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया का संचालन सुनिश्चित किया जा सके।

विशेषताएं

  • खतरे की श्रेणियों की पहचान करना
  • पुलिस प्रमुख द्वारा खतरा विश्लेषण रिपोर्ट तैयार करना
  • रिकॉर्ड की गोपनीयता व संरक्षण
  • गवाह की पहचान की सुरक्षा, पहचान परिवर्तन तथा गवाह का संरक्षण इत्यादि

गवाहों की श्रेणियां

  1. गवाह अथवा उसके परिवार के जीवन को खतरा
  2. गवाह की सुरक्षा, सम्पति, परिवार के सदस्यों इत्यादि को खतरा
  3. गवाह की सुरक्षा, सम्पति, परिवार के सदस्यों इत्यादि को मध्यम स्तर का खतरा

उपरोक्त श्रेणी के गवाह जिले के सक्षम प्राधिकारी के समक्ष सुरक्षा के लिए आवेदन कर सकते हैं। सक्षम प्राधिकारी जिला व सत्र न्यायाधीश हो सकते हैं।

 

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राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस: 9 नवम्बर

भारत में प्रत्येक वर्ष 9 नवम्बर को राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है, इसका उद्देश्य सभी नागरिकों तक कानूनी सहायता सुनिश्चित करना है तथा समाज के कमज़ोर वर्गों को निशुल्क व कुशल कानूनी सहायता उपलब्ध करवाना है। इस दिवस के द्वारा समाज के वंचित व कमज़ोर वर्ग को कानूनी सहायता के सम्बन्ध में उनके अधिकार के बारे में जागरूक भी किया जाता है।

इस दिवस पर देश भर में लोगों को समानतापूर्वक कानूनी सेवा प्रदान करने के लिए लोक अदालतों का आयोजन किया जाता है। इसके अतिरिक्त विभिन्न स्थानों पर कानूनी साक्षरता के लिए कैंप तथा समारोहों का आयोजन किया जाता है, इसके द्वारा कमज़ोर वर्ग के लिए निशुल्क कानूनी सेवा के के बारे में जागरूकता फैलाने का कार्य भी किया जाता है।

राष्ट्रीय कानूनी सेवा दिवस

इस दिवस की शुरुआत भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने 1995 में देश के कमजोर व निर्धन वर्ग को निशुल्क कानूनी सेवा उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से किया था। इसका उद्देश्य महिलाओं, दिव्यांग जन, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति तथा मानव तस्करी के शिकार इत्यादि विभिन्न वर्गों को निशुल्क कानूनी सहायता प्रदान करना है।

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