साइबर अपराध

नई दिल्ली में किया जा रहा है साइबर अपराध जांच-पड़ताल तथा साइबर फोरेंसिक्स पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन

नई दिल्ली में प्रथम साइबर अपराध जांच-पड़ताल तथा साइबर फोरेंसिक्स पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है, इस सम्मेलन का आयोजन 4-5 सितम्बर, 2019 के दौरान किया जा रहा है। इस सम्मेलन का उद्घाटन सीबीआई के निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला द्वारा किया गया।

मुख्य बिंदु

इस सम्मेलन का उद्देश्य एक प्लेटफार्म पर शोधकर्ताओं, फॉरेंसिक विशेषज्ञों, शिक्षाविदों तथा वकीलों को लाना है तथा साइबर अपराध के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करना है।

साइबर अपराध कानून लागू करने वाली एजेंसियों के सामने एक बड़ी चुनौती है, इस तरह के अपराध काफी जटिल होते हैं, इस तरह के अपराधों की खोज-बीन के लिए विशेष कौशल तथा फॉरेंसिक ज्ञान होना आवश्यक है। इस सम्मेलन में साइबर अपराध से सम्बंधित लगभग 50 DGP, ADGP तथा SP हिस्सा ले रहे हैं।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

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व्हाट्सएप्प ने स्पाईवेयर अटैक की पुष्टि की

विश्व की सबसे अधिक लोकप्रिय मैसेजिंग एप्प में से एक व्हाट्सएप्प ने हाल ही में टार्गेटेड स्पाईवेयर अटैक की पुष्टि कर दी है। गौरतलब है कि व्हाट्सएप्प को दुनिया भर में 1.5 अरब से अधिक लोग इस्तेमाल करते हैं।

मुख्य बिंदु

व्हाट्सएप्प की सुरक्षा व्यवस्था में एक खामी थी, जिसका उपयोग करके हैकरों ने यूजर के फ़ोन में हानिकारक सॉफ्टवेयर डाला। इससे एंड्राइड तथा iOS डिवाइसेस दोनों प्रभावित हुई। व्हाट्सएप्प को इस सुरक्षा खामी का पता मई के आरम्भ में चला, व्हाट्सएप्प ने इसके दस दिन के भीतर ही इस समस्या का समाधान करके अपडेट प्रस्तुत की थी।

मुख्य बिंदु

व्हाट्सएप्प के एक “सुरक्षित” संचार एप्प माना जाता है, क्योंकि व्हाट्सएप्प में एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तकनीक का उपयोग किया जाता है। इस तकनीक के द्वारा सन्देश भेजने वाली तथा सन्देश प्राप्त करने वाली डिवाइस पर ही सन्देश को पढ़ा जा सकता है। परन्तु स्पाईवेयर की इस घटना के द्वारा हैकर भी इस सन्देश को पढ़ सकता था।

इस घटना के बाद अरबों लोगों का डाटा खतरे में था। इस खतरे से बचने के लिए यूजर को अपनी डिवाइस पर व्हाट्सएप्प को अपडेट करना होगा। ऐसा माना जा रहा है कि इस हैकिंग टूल का विकास इजराइल में बेस्ड एक फर्म “NSO ग्रुप” ने किया है। इस फर्म पर पहले भी मध्य पूर्व से लेकर मेक्सिको तक एक्टिविस्ट तथा पत्रकारों की जासूसी का आरोप लगा था।

NSO ग्रुप 2016 में तब सुर्ख़ियों में आया था जब कई अनुसंधकर्ताओं ने इस पर संयुक्त अरब अमीरात में एक एक्टिविस्ट की जासूसी करने का आरोप लगा था। अतीत में इसे “साइबर हथियार डीलर” भी कहा जाता है। NSO ग्रुप ने “पेगासस” नामक एक टूल का विकास किया था, इस टूल के माध्यम से टारगेट फ़ोन के कैमरा तथा माइक्रोफोन को स्विच ऑन किया जा सकता है, तथा लोकेशन की जानकारी व अन्य डाटा प्राप्त किया जा सकता है। परन्तु इस फर्म ने स्पाईवेयर विवाद में स्वयं के शामिल न होने का हवाला दिया है।

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