सीमा सड़क संगठन

रक्षा मंत्री ने ईस्ट सियांग में सिस्सेरी रिवर ब्रिज का उद्घाटन किया

केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अरुणाचल प्रदेश के ईस्ट सियांग जिले में सिस्सेरी रिवर ब्रिज का उद्घाटन किया। इस पुल की सहायता से स्थानीय क्षेत्र के विकास को बल मिलेगा।

सिस्सेरी रिवर ब्रिज

इस पुल की लम्बाई 200 मीटर है, यह पुल जोनाई-पासीघाट-राणाघाट-रोइंग रोड पर स्थित है। इस पुल से पासीघाट से रोइंग की यात्रा के समय में पांच घंटे की कमी आएगी। इस पुल की सहायता से ढोला सदिया पुल के माध्यम से तिनसुकिया को भी कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके द्वारा यह पुल दिबांग घाटी तथा सियांग को भी कनेक्टिविटी उपलब्ध करवाएगा।

सिस्सेरी रिवर ब्रिज का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) के प्रोजेक्ट ब्रह्मंक द्वारा किया गया है। बीआरओ ने अरुणाचल प्रदेश के दुर्गम इलाकों में कनेक्टिविटी के लिए चार प्रोजेक्ट शुरू किये हैं, यह प्रोजेक्ट हैं : अरुणांक, वर्तक, ब्रह्मांक तथा उदयक।

Categories:

Month:

Tags: , , , , , , , , , ,

भारत के सबसे ऊँचे पुल का उद्घाटन किया गया

रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने लद्दाख में कर्नल चेवांग रिनचेन सेतु का उद्घाटन किया। इस पुल का नाम कर्नल चेवांग रिनचेन के नाम पर रखा गया है, कर्नल रिनचेन लद्दाख से भारतीय सेना के अफसर थे। उन्हें 1952 में महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था।

कर्नल चेवांग रिनचेन सेतु

  • इस पुल का निर्माण लद्दाख क्षेत्र में 14,650 फीट की ऊंचाई पर किया गया है।
  • इस पुल का निर्माण सामरिक रूप से महत्वपूर्ण दुरबुक श्योक दौलत बेग ओल्डी सड़क पर किया गया है।
  • यह चीन के साथ लगने वाली लाइन ऑफ़ एक्चुअल कण्ट्रोल से 45 किलोमीटर पूर्व में स्थित है।
  • इस पुल की चौड़ाई 4.5 मीटर है, यह पुल 70 टन श्रेणी के वाहनों का भार उठाने में सक्षम है।
  • इससे श्योक नदी के दूसरी ओर के क्षेत्र में विकास को गति मिलेगी तथा यात्रा के समय में भी कमी आएगी।
  • इस पुल का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा किया गया है।
  • इस पुल का निर्माण 15 महीने में किया गया, इसमें 6900 क्यूबिक मीटर कंक्रीट तथा 1984 मीट्रिक टन स्टील का उपयोग किया गया।

कर्नल चेवांग रिनचेन

कर्नल चेवांग रिनचेन को ‘लद्दाख का शेर’ भी कहा जाता है, उन्हें दो बार महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था। 1948 में पाकिस्तानी कबाइलियों द्वारा कारगिल पर कब्ज़ा किये जाने के बाद वे लेह पर कब्ज़ा करने की फिराक में थे। इस क्षेत्र से संख्या लेफ्टिनेंट कर्नल पृथी  सिंह द्वारा की गयी थी, उनके पास केवल 33 सैनिक थे। उस समय कर्नल पृथी सिंह ने सहायता मांगी, 17 वर्षीय रिनचेन उनकी सहायता करने वाले प्रथम व्यक्ति थे। रिनचेन ने अपने 28 मित्रों को भर्ती करके ‘लद्दाख स्काउट्स’ का गठन किया और युद्ध में विजय हासिल की। उनकी इस वीरता के लिए उन्हें 1952 में महावीर चक्र से सम्मानित किया था।

1971 में लद्दाख के प्रतापपुर सेक्टर में दुश्मन के नौ ठिकानों को मुक्त करने के लिए उन्हें पुनः महावीर चक्र से सम्मानित किया गया।

Categories:

Month:

Tags: , , , , ,

Advertisement