सीमा सड़क संगठन

प्रोजेक्ट संपर्क : रक्षा मंत्री ने जम्मू-कश्मीर में उझ और बसंतर पुल का उद्घाटन किया

केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में 1 किलोमीटर लम्बे उझ पुल तथा साम्बा में 617.40 मीटर लम्बे बसंतर पुल का उद्घाटन किया। इन दोनों पुलों का निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा प्रोजेक्ट संपर्क के तहत किया गया है।

मुख्य बिंदु

उझ पुल : इस पुल की लम्बाई एक किलोमीटर है, यह सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित किया जाने वाला सबसे लम्बा पुल है। इस पुल का निर्माण निर्धारित समय के भीतर किया है। इस पुल का निर्माण लगभग 50 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह पुल उझ नाला पर परोल-कोरेपन्नु-राजपुरा सड़क पर स्थित है।

बसंतर पुल : इस पुल का निर्माण 41.7 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। यह पुल राजपुरा-मदवाल-पंगादुर-फूलपुर सड़क पर बसंतर नाला पर स्थित है।

यह दोनों पुल कठुआ और साम्बा के गावों के लिए काफी महत्वपूर्ण है, इससे कनेक्टिविटी बेहतर होगी।

प्रोजेक्ट संपर्क

इसकी शुरुआत सीमा सड़क संगठन द्वारा 1975 में की गयी थी, इसका मुख्यालय जम्मू है। इसमें पीर पंजाल (उत्तर) से पठानकोट (दक्षिण) तथा पुंछ (पश्चिम) से डलहौज़ी (पूर्व) तक का 2200 किलोमीटर का सड़क नेटवर्क शामिल है।

BRO सीमा से लगे इलाकों में सडक का निर्माण व मरम्मत का कार्य करता है, यह स्थानीय लोगों तथा सेना दोनों के लिए उपयोगी है।

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सीमा सड़क संगठन ने किया भारत के प्रथम प्राकृतिक आइस कैफ़े का निर्माण

भारत का पहला प्राकृतिक आइस कैफ़े लद्दाख के लेह में 14,000 फीट की ऊंचाई पर शुरू हो गया है। यह आइस कैफ़े मनाली-लेह हाईवे पर स्थित है। इसका निर्माण सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा प्राकृतिक प्रक्रिया द्वारा किया गया है। इसका उद्देश्य शीतकाल में पानी की बचत करना तथा बाद में आवश्यकता पड़ने पर इसका उपयोग सिंचाई के लिए किया जा सकता है। इस कैफ़े को सोनम वांगचुक के बर्फीले स्तूप की भांति तैयार किया गया है। यह पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन गया है।

बर्फीले स्तूप

  • बर्फीले स्तूप एक किस्म के कृत्रिम ग्लेशियर हैं, यह ग्लेशियर शीतकाल जम जाने के कारण जल का संरक्षण करते हैं।
  • यह कृत्रिम ग्लेशियर बसंत ऋतू में पिघलते हैं, इस दौरान खेतों में इस जल की आवश्यकता भी होती है।
  • लेह शीत मरुस्थल क्षेत्र में आता है, यहाँ अधिकतर गाँव जल की कमी की समस्या से जूझते हैं, विशेषतः अप्रैल और मई में पानी की समस्या काफी अधिक होती है। जबकि जुलाई में बर्फ के पिघलने के कारण फ़्लैश फ्लड जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है।
  • सितम्बर तक कृषि सम्बन्धी सभी गतिविधियाँ पूरी हो जाती हैं और शीतकाल में छोटी-छोटी धाराओं में जल व्यर्थ होकर सिन्धु नदी में बहता जाता है।
  • इस समस्या को देखते हुए बर्फीले स्तूप का विचार उत्पन्न हुआ, इसके द्वारा शीतकाल में व्यर्थ बहने वाले जल को बर्फ के पहाड़ के रूप में स्टोर करने की योजना बनायीं गयी, बाद में जब खेतों में जल की आवश्यकता होती है तब इस जल का उपयोग किया जा सकता है।
  • बर्फीले स्तूप का उद्देश्य क्षेत्र में जल की समस्या का समाधान करना है।

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