सीमा सड़क संगठन

सीमा सड़क संगठन का 59वां स्थापना दिवस : 7 मई, 2019

सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने 7 मई, 2019 को अपना 59वां स्थापना दिवस (Raising Day) मनाया। बीआरओ देश के सीमावर्ती इलाकों में आधारभूत संरचना विकास के क्षेत्र में अग्रणी सरकारी संगठन है। 1960 में इसकी स्थापना के बाद से यह 2 से लेकर 19 परियोजनाओं के साथ आगे बढ़ रहा है। इसके द्वारा किए गए कार्यों ने देश के दूरस्थ इलाकों में क्षेत्रीय अखंडता और सामाजिक-आर्थिक उत्थान को सुनिश्चित किया है।

सीमा सड़क संगठन (BRO)

सीमा सड़क संगठन (BRO) भारत के सीमान्त क्षेत्रों में सड़क नेटवर्क का निर्माण तथा प्रबंधन करता है। यह संगठन अफ़ग़ानिस्तान, भूटान, म्यांमार और श्रीलंका में भी अधोसंरचना निर्माण कार्य करता है। इसकी स्थापना 7 मई, 1960 को की गयी थी। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है।

शांतिकाल में सीमा सड़क संगठन (BRO) के कार्य निम्नलिखित हैं :

  • सीमा क्षेत्रों में ऑपरेशनल रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर ऑफ़ जनरल स्टाफ का विकास व प्रबंधन।
  • अंतर्राष्ट्रीय सीमा से लगने वाले राज्यों के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान देना।

युद्धकाल में BRO के कार्य निम्नलिखित हैं:

  • ओरिजिनल सेक्टर तथा री-डिप्लाएड सेक्टर में लाइन ऑफ़ कण्ट्रोल का प्रबंधन
  • युद्ध प्रयास के दौरान सरकार द्वारा सौंपे गये अतिरिक्त कार्य

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प्रधानमंत्री मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में सेला सुरंग की आधारशिला रखी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश में सेला टनल प्रोजेक्ट की आधारशिला सेला दर्रे के पास रखी।

सेला दर्रा

सेला दर्रा एक ऊंचाई वाला परिवर्तीय दर्रा है, यह दर्रा अरुणाचल प्रदेश में तवांग तथा पश्चिम कामेंग जिलों की सीमा पर स्थित है। यह दर्रा तवांग को शेष भारत से जोड़ता है।

सेला सुरंग परियोजना के प्रमुख तथ्य

  • इस सुरंग का निर्माण सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) द्वारा किया जाएगा।
  • इस परियोजना की घोषणा केन्द्रीय बजट 2018 में अरुण जेटली ने की थी।
  • इस परियोजना को 687 करोड़ रुपये की लागत से पूरा किया जायेगा, यह परियोजना तीन वर्षों में पूरी हो जाएगी।
  • इस परियोजना के तहत 12.04 किलोमीटर की दूरी की सड़क का निर्माण किया जायेगा, इसमें 1790 मीटर तथा 475 मीटर की दो सुरंगे भी शामिल हैं।
  • इस परियोजना के पूरा होने के बाद तेजपुर और तवांग के बीच यात्रा के समय एक घंटे की कमी हो जाएगी।
  • यह सुरंग परियोजना सेना के लिए भी काफी उपयोगी है। इससे आल-वेदर कनेक्टिविटी के साथ यात्रा के समय में भी कमी होगी।
  • इस सुरंग से उत्तर-पूर्वी राज्यों में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा और आर्थिक गतिविधियाँ भी तीव्र होंगी।

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