सूचना का अधिकार अधिनियम

ऑपरेशन डेजर्ट चेज़

राजस्थान पुलिस ने हाल ही में सैन्य खुफिया सूचनाओं के आधार पर जयपुर में दो नागरिक रक्षा कर्मचारियों को गिरफ्तार किया। उन्हें इस इनपुट पर गिरफ्तार किया गया था कि वे पाकिस्तान की जासूसी एजेंसी आईएसआई (इंटर सर्विस इंटेलिजेंस) को संवेदनशील सूचनाएं दे रहे थे। ऑपरेशन डेजर्ट चेज के तहत यह सूचना पारित की गई थी।

ऑपरेशन डेजर्ट चेज़

यह ऑपरेशन एक एंटी-जासूसी ऑपरेशन है जो 2019 में सैन्य इंटेलिजेंस द्वारा शुरू किया गया था। इसमें कई लोगों को आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम, 1923 के तहत गिरफ्तार किया गया था।

आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम

यह अधिनियम उन कार्यों की निंदा करता है जिसमें भारत के खिलाफ एक दुश्मन राज्य की मदद करना शामिल है। 2017 में गृह मंत्रालय ने इस अधिनियम में संशोधन करने पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। यह रिपोर्ट में अधिनियम को अधिक पारदर्शी और आरटीआई अधिनियम (सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005) के अनुरूप बनाने का प्रयास कर रही है।

आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उपयोग करने वाले अन्य देशों में हांगकांग, यू.के., म्यांमार, सिंगापुर और मलेशिया शामिल हैं। यह अधिनियम न्यूजीलैंड और कनाडा में प्रचलन में था।

आईएसआई

भारत सरकार के अनुसार, पाकिस्तान की इंटर-सर्विस इंटेलिजेंस भारत के लोगों के खिलाफ आतंकवादी हमलों की योजना बनाने और उन्हें अंजाम देने में शामिल है। इसका निर्माण 1947 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के बाद किया गया था। आईएसआई को जम्मू और कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बनाने का कार्य दिया गया था। इसके साथ ही ऑपरेशन टुपैक शुरू किया गया था।

ऑपरेशन टुपैक

यह ऑपरेशन पाकिस्तान की आईएसआई द्वारा संचालित एक सैन्य ऑपरेशन है। इस ऑपरेशन के तीन भाग हैं :

  • भारत को विघटित करना
  • नेपाल और बांग्लादेश के साथ छिद्रपूर्ण सीमाओं का लाभ उठाना और ठिकानों को स्थापित करना
  • जासूसी नेटवर्क का उपयोग करना

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भारत के मुख्य न्यायधीश का कार्यालय RTI के दायरे में आता है : सर्वोच्च न्यायालय

सर्वोच्च न्यायालय ने 13 नवम्बर, 2019 को स्पष्ट किया कि भारत के मुख्य न्यायधीश का कार्यालय भी सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे में आता है। इस पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ की अध्यक्षता मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई द्वारा की गयी, इस पीठ में जस्टिस एन.वी. रमण, जस्टिस डी. वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस दीपक गुप्ता तथा जस्टिस संजीव खन्ना शामिल थे।

सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005

संसद ने 15 जून, 2005 को इस बिल को पारित किया था, यह अधिनियम 12 अक्टूबर, 2005 को लागू हुआ था। इस अधिनियम के तहत सरकारी विभागों को नागरिकों द्वारा मांगी गयी सूचना का जवाब निश्चित समय के भीतर देना पड़ता है। इसका पालन न करने पर सरकारी अधिकारियों पर जुर्माना भी लगाया जा सकता है। RTI अधिनियम का उद्देश्य पारदर्शिता का बढ़ावा देना व सरकारी विभागों की जवाबदेही सुनिश्चित करना है। इस अधिनियम के तहत RTI आवेदन पत्र को जवाब सरकारी विभाग को 30 दिन के भीतर देना होता है।

नोट

RTI के तहत आतंरिक सुरक्षा से सम्बंधित जानकारी, बौद्धिक संपदा इत्यादि जानकारी नहीं दी जा सकती। निर्णय लागू किये जाने तक कैबिनेट पेपर्स को भी RTI के दायरे से बाहर रखा गया है। कैबिनेट द्वारा किये गए विचार-विमर्श इत्यादि को भी RTI के दायरे से बाहर रखा गया है।

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