स्टैण्डर्ड एंड पूअर्स

फिच रेटिंग्स ने भारत के जीडीपी दर के अनुमान को घटाकर किया 7.2%

फिच रेटिंग्स ने भारत के वर्तमान वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भारत की सकल घरेलु उत्पादन दर के अनुमान को 7.8% घटाकर  7.2% कर दिया है। हालाँकि फिच रेटिंग्स ने भारत के बढ़ते हुए तेल के व्यय तथा कमज़ोर बैंक बैलेंस शीट पर भी प्रकाश डाला है।

मुख्य बिंदु

सितम्बर में फिच रेटिंग्स ने जीडीपी की विकास दर  7.8% रहने के अनुमान लगाया था, अब फिच ने अपने अनुमान को संशोधित किया है। पहले अप्रैल-जून की अवधि के लिए जीडीपी दर का अनुमान 7.7% था। फिच रेटिंग्स ने वित्त वर्ष 2019-20 में विकास दर 7% और 2020-21 में 7.1% रहने का अनुमान लगाया है।

फिच रेटिंग्स

फिच रेटिंग्स विश्व की तीन सबसे बड़ी रेटिंग एजेंसियों में से एक है, अन्य दो प्रमुख एजेंसियां मूड़ीज़ और स्टैण्डर्ड एंड पूअर्स हैं। इसका मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित है। इसका पूर्व स्वामित्व हेअर्स्ट कारपोरेशन के पास है। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी एक किस्म की कंपनी होती है जो क्रेडिट रेटिंग प्रदान करती है। यह ऋणी द्वारा समय पर ऋण के भुगतान अथवा डिफ़ॉल्ट की सम्भावना की योग्यता का अनुमान लगाती है।

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केरल अधोसंरचना निवेश फण्ड बोर्ड विकास कार्य के लिए जारी करेगा 5,000 करोड़ रुपये के मसाला बांड

केरल अधोसंरचना निवेश फण्ड बोर्ड विकास कार्य के लिए 5,000 करोड़ रुपये के मसाला बांड जारी करेगा। मसाला बांड की रेटिंग के लिए केरल अधोसंरचना निवेश फण्ड बोर्ड ने स्टैण्डर्ड एंड पूअर्स और फिच रेटिंग्स को नियुक्त किया गया। इन बांड को लन्दन तथा सिंगापुर स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड किया जायेगा। इन बांड्स के द्वारा 10 वर्ष की अवधि के दौरान फंड्स प्राप्त किये जायेंगे।

केरल अधोसंरचना निवेश फण्ड बोर्ड (KIIFB)

यह केरल सरकार का वित्तीय संस्थान है, इसका कार्य राज्य के राजस्व के अतिरिक्त अधोसंरचना विकास के लिए फंड्स की व्यवस्था करना है। इसका गठन केरल अधोसंरचना निवेश फण्ड अधिनियम, 1999 के द्वारा किया गया था।

मसाला बांड

मसाला बांड रुपये में जारी किये जाते हैं, इनके द्वारा भारतीय इकाइयां विदेशी बाज़ार से विदेशी मुद्रा की बजाय भारतीय रुपये में निवेश प्राप्त कर सकती हैं। यह एक प्रकार का ऋण पत्र है जिसके द्वारा कॉर्पोरेट विदेशी निवेशकों से स्थानीय मुद्रा में धन एकत्रित कर सकते  हैं। रुपये में बांड जारी करने से मुद्रा के मूल्य में होने वाले परिवर्तन का प्रभाव जारीकर्ता व निवेशकों पर नहीं पड़ेगा। जारीकर्ता मसाला बांड के द्वारा अपने फण्ड के स्त्रोत का विविधिकरण कर सकता है। इससे रुपये का अंतर्राष्ट्रीयकरण भी होगा और भारतीय बांड बाज़ार का विस्तार भी होगा। दीर्घकाल में इसके कारण रुपये की गिरावट में कमी आ सकती है।

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