स्वर्णिम चतुर्भुज

मिशन रफ्तार : रेलगाड़ियों की गति बढ़ाने के लिए एक दिवसीय कार्यशाला

रेल मंत्रालय ने एक दिवसीय कार्यशाला ‘मिशन रफ्तार’ का आयोजन किया जिसका उद्देश्य नई दिल्ली में फ्रेट ट्रेनों तथा यात्री ट्रेनों की औसत गति में वृद्धि करना है. कार्यशाला का उद्घाटन रेल राज्य मंत्री श्री राजेन गोहेन और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष श्री अश्विनी लोहानी ने किया था. इस एक दिवसीय कार्यशाला के अवसर पर रेलवे बोर्ड के सभी सदस्य, रेल मंडलों के महाप्रबंधक सहित वरिष्ठ रेल अधिकारी भी उपस्थित थे.

मिशन रफ्तार का लक्ष्य और इसके महत्व

इस मिशन का लक्ष्य फ्रेट ट्रेनों की औसत गति को दोगुना करना और यात्री ट्रेनों की औसत गति पांच वर्ष की अवधि में 25 किमी प्रति घंटे तक बढ़ाना है. सड़क और हवाई मार्ग से मिलने वाली प्रतिस्पर्धा के साथ तालमेल रखने के लिए भारतीय रेलवे की रणनीति के हिस्से के रूप में इस मिशन को लॉन्च किया गया है. रेलों की औसत गति को बढ़ाने से यात्रा अवधि को कम करने, माल ढोने में लगने वाले समय को कम करने, संचालन लागत को कम करने, राजस्व बढ़ाने तथा रेलवे की बाजार हिस्सेदारी को बढ़ाने में निश्चित रूप से मदद मिलेगी. स्वर्णिम चतुर्भुज (दिल्ली-मुंबई-चेन्नई-कोलकाता) पर रेलवे के प्रमुख मार्ग है. इन रेल-मार्गों से 58 प्रतिशत फ्रेट यातायात तथा 52 प्रतिशत यात्री यातायात का संचालन होता है.

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एशियाई विकास बैंक और भारत सरकार ने ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए।

एशियाई विकास बैंक और भारत सरकार ने रेलवे की परिचालन क्षमता को बेहतर करने के लिए भीड़-भाड़ वाले गलियारों से सटे रेल‍वे की पटरियों को दोहरी लाइन में तब्‍दील करने तथा वि़द्युतीकरण से संबंधित कार्यों को पूरा करने के लिए 120 मिलियन डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस राशि का उपयोग पूर्ववर्ती किस्‍तों के तहत शुरू किये गये कार्यों को पूरा करने में किया जाएगा। ऋण की यह तीसरी किस्‍त स्‍वीकृत वर्ष 2011 में एडीबी के बोर्ड द्वारा किये गये रेल क्षेत्र निवेश कार्यक्रम से जुड़ी 500 मिलियन डॉलर की बहु-किस्‍त वित्‍त पोषण सुविधा का एक हिस्‍सा है।

इस परियोजना का उद्देश्‍य

देश में महत्‍वपूर्ण मार्गों पर रेल लाइनों के विद्युतीकरण , दोहरीकरण और आधुनिक सिग्‍नलिंग प्रणाली को स्‍थापित कर रेलवे की बुनियादी ढांचागत सुविधाओं की क्षमता को बढ़ाना है। इससे कम ऊर्जा खपत, सुरक्षित और विश्‍वसनीय रेल प्रणाली विकसित करने में मदद मिलेगी, जिससे परियोजना के तहत आने वाले रेल रूटों पर सफर की अवधि घटाने में मदद मिलेगी और बेहतर परिचालनगत एवं वित्‍तीय दक्षता सुनिश्चित होगी।

इससे छत्‍तीसगढ़, ओडिशा, महाराष्‍ट्र, कर्नाटक और आन्‍ध्र प्रदेश के व्‍यस्‍त माल एवं यात्री ढुलाई वाले रूटों को लक्षित किया जा रहा है, जिसमें ‘स्वर्णिम चतुर्भुज’ गलियारा शामिल है, जो चेन्‍नई, कोलकाता, मुम्‍बई और नई दिल्‍ली को आपस में जोड़ता हैं। रेल खंडों का दोहरीकरण दौंड-टिटलागढ़ खंड, संबलपुर-टिटलागढ़ खंड, रायपुर-टिटलागढ़ खंड और हॉस्पेट-टिनाइघाट खंड पर किया जा रहा है, विद्युतीकरण का कार्य 641 किलोमीटर लंबे पुणे-वाडी गुंटाकल खंड पर किया जा रहा है।

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