हाइड्रोकार्बन

ONGC ने मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में की तेल के भंडारों की खोज

सरकारी तेल कंपनी ONGC ने मध्य प्रदेश और पश्चिम बंगाल में तेल के भण्डार की खोज की है। यह भंडार श्रेणी-III बेसिन हैं, इसमें हाइड्रोकार्बन मौजूद हैं। इससे देश में दो नए अवसादी बेसिन शुरू हो सकते हैं।

मुख्य बिंदु

मध्य प्रदेश : मध्य प्रदेश में विन्ध्य बेसिन में गैस के निक्षेप पाए गए हैं। इसकी खोज 3000 मीटर की गहराई पर हुई है, अभी यहाँ पर परीक्षण कार्य चला हुआ है। इस खोज के बाद चार कुँए भी खोदे गए। अब इस क्षेत्र के वाणिज्यिक उपयोग लिए हाइड्रो-फ्रैक परीक्षण किया जायेगा।

पश्चिम बंगाल : पश्चिम बंगाल के 24 परगना जिले के अशोक नगर में तेल व गैस को खोज की गयी है।

पृष्ठभूमि

भारत में 26 अवसादी बेसिन हैं, इनमे से केवल 7 श्रेणी-I बेसिन हैं जिनका उपयोग गैस व तेल के वाणिज्यिक उत्पादन के लिए किया जा सकता है। ONGC ने असम शेल्फ को छोड़कर अन्य 6 बेसिनों खम्बात, मुंबई, राजस्थान, कृष्णा गोदावरी, कावेरी और असम-अरकान फोल्ड बेल्ट में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू किया है। सातवें बेसिन को 1985 में शुरू किया गया था।

26 अवसादी बेसिन

श्रेणी-I बेसिन : खम्बात, मुंबई ऑफशोर, राजस्थान, कृष्णा गोदावरी, कावेरी, असम शेल्फ तथा असम-अरकान फोल्ड बेल्ट।

श्रेणी-II बेसिन : कच्छ, महानदी-NCE (उत्तर-पूर्वी तट), अंडमान-निकोबार, केरल-कोंकण-लक्षद्वीप। यह बेसिनों में हाइड्रोकार्बन के निक्षेप होने के अनुमान है, परन्तु अभी तक यहाँ पर वाणिज्यिक उत्पादन शुरू नहीं हुआ है।

श्रेणी-III बेसिन : हिमालयन फोरलैंड बेसिन, गंगा बेसिन, विन्ध्य बेसिन, सौराष्ट्र बेसिन, केरल-कोंकण बेसिन तथा बंगाल बेसिन। इन बेसिनों में हाइड्रोकार्बन के भंडार मौजूद हैं।

श्रेणी-IV बेसिन : करेवा, स्पीती-जास्कर, सतपुड़ा-दक्षिण रीवा-दामोदर, छत्तीसगढ़, नर्मदा, दक्कन-सिनक्लाइज़, भीमा-कलादगी, बस्तर, प्राणहिता गोदावरी तथा कुद्दपा। यह अनिश्चित क्षमता वाले बेसिन हैं।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , ,

केन्द्रीय कैबिनेट ने दी अपरम्परागत हाइड्रोकार्बन के दोहन के लिए पालिसी फ्रेमवर्क को मंजूरी

केन्द्रीय कैबिनेट ने अपरम्परागत हाइड्रोकार्बन के दोहन के लिए पालिसी फ्रेमवर्क को मंज़ूरी प्रदान की। अपरम्परागत हाइड्रोकार्बन में शेल गैस, कोल बेड मीथेन (CBM) इत्यादि शामिल हैं। यह साझा उत्पादन अनुबंध के तहत क्रियान्वित की जाएगी। हाइड्रोकार्बन के भंडार दोहन करने के लिए सरकार द्वारा कंपनियों को प्रोत्साहन दिया जायेगा।

महत्त्व

इस पालिसी से उन क्षेत्रों में हाइड्रोकार्बन के दोहन को बढ़ावा मिलेगा, जिन्हें पहले ही अनुबंध पर दिया गया है। इस पालिसी के तहत अपरम्परागत हाइड्रोकार्बन के दोहन के लिए नए निवेश पर बल दिया जायेगा। इससे आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि होगी तथा अतिरिक्त रोज़गार के अवसर उत्पन्न होंगे। अपरम्परागत हाइड्रोकार्बन के दोहन के लिए नवीन तकनीक का उपयोग किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

आरम्भ में साझा उत्पादन अनुबंध के तहत पहले से कार्यरत्त कांट्रेक्टर आबंटित क्षेत्र में CBM अथवा अपरम्परागत हाइड्रोकार्बन का दोहन नहीं कर सकते थे। पुरानी व्यवस्था में एक CBM कांट्रेक्टर, CBM के अलावा किसी अन्य हाइड्रोकार्बन की खोज अथवा दोहन नहीं कर सकता था। भारत के अवसादी बेसिन में CBM ब्लॉक्स में कॉन्ट्रैक्टर्स काफी बड़ा हिस्सा है।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , ,

Advertisement