हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड

नौसेना ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ 2 डाइविंग सपोर्ट वेसल के निर्माण के लिए किया अनुबंध

भारतीय नौसेना ने हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड के साथ 2 डाइविंग सपोर्ट वेसेल के निर्माण के लिए अनुबंध किया है। इससे पनडुब्बी व तट पर भारतीय नौसेना के कार्यशीलता में वृद्धि होगी।

मुख्य बिंदु

पहले डाइविंग सपोर्ट वेसल का निर्माण 36 महीने के दौरान किया जायेगा, इसके 6 महीने बाद दूसरे वेसल का निर्माण किया जायेगा। इस वेसल को विशाखापत्तनम और मुंबई में तैनात किया जायेगा। इनकी लम्बाई 118 मीटर होगी तथा इनकी जल विस्थापन क्षमता 7,650 टन होगी। इन वेसल में डीप सबमर्जेंस रेस्क्यू वेसल का उपयोग किया जाएगा, इससे राहत व बचाव कार्यों में कुशलता में वृद्धि होगी। यह वेसल 650 मीटर की गहराई में पनडुब्बी बचाव कार्य कर सकते हैं।

आवश्यकता

भारतीय नौसेना हिन्द महासागर क्षेत्र भारत की जल सीमा की सुरक्षा करने के अलावा में पनडुब्बी बचाव, परीक्षण, जलमग्न निरीक्षण तथा सागर में एयरक्राफ्ट व समुद्री जहाज़ के अवशेष की रिकवरी इत्यादि का कार्य भी करती है। इस सभी कार्यों के लिय गोताखोर ऑपरेशन की ज़रूरत होती है और इसके लिए गोताखोरों को लम्बे समय तक पानी के अन्दर रहना पड़ता है। इस कार्य के लिए गोतोखोरों के लांच, रिकवरी तथा उपकरणों को ले जाने के लिए उपयुक्त  प्लेटफार्म की आवश्यकता पड़ती है। इस कार्य डाइविंग सपोर्ट वेसल काफी उपयोगी सिद्ध होंगे।

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VC 11184: हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड करेगा भारत के पहले समुद्री निगरानी पोत का ट्रायल

हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड ने भारत के पहले समुद्री निगरानी पोत का परीक्षण करने का निर्णय लिया है। यह समुद्री परीक्षण सितम्बर के अंतिम सप्ताह अथवा अक्टूबर, 2018 के प्रथम सप्ताह में किया जायेगा। इस पोत को VC 11184 नाम से संबोधित किया जाता है, इसका आधिकारिक नामकरण नौसेना में शामिल होने के बाद किया जायेगा।

VC-11184

VC-11184 का निर्माण हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा किया गया है। यह भारत का पहला समुद्री निगरानी पोत है, इसका निर्माण देश की सामरिक सुरक्षा के लिए किया जा रहा है। हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड वर्ष 2018 के अंत तक इस पोत को भारतीय नौसेना को सौंप देगा। इस पोत का निर्माण राष्ट्रीय तकनीकी अनुसन्धान संगठन (NTRO) के लिए किया जा रहा है, NTRO प्रधानमंत्री कार्यालय तथा राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के पर्यवेक्षण में कार्य करता है।

इस पोत की जल विस्थापन क्षमता 10,000 टन से अधिक है। इसकी लम्बाई 175 मीटर तथा बीम 22 मीटर है।यह अधिकतम 21 नॉट की गति से आगे बढ़ सकती है। इसमें दो आयातित 9000 किलोवाट कंबाइंड डीजल व डीजल इंजन तथा 1200 ekW के सहायक जनरेटर का उपयोग किया जा रहा है।

इस पोत में एक साथ 300 सदस्यों का क्रू कार्य कर सकता है। इसमें संचार के लिए आधुनिक उपकरण तथा हेलीकाप्टर की लैंडिंग के लिए स्थान भी है। कुछ समय पहले इस पोत ने बेसिन ट्रायल को सफलतापूर्वक पूरा किया था। इस पोत का इस्तेमाल मिसाइल ट्रैकिंग के लिए जायेगा, इसके लिए इस पोत में 2 सेंसर लगाये गए हैं।

महत्व

इस भारत का सबसे आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक ट्रैकिंग न निगरानी पोत है। इसे भारत के बैलिस्टिक मिसाइल डिफेन्स कार्यक्रम के दूसरे चरण का पहला पोता होगा। नौसेना में इस पोत के शामिल होने के बाद भारत उन चुनिन्दा देशों की श्रेणी में शामिल हो जायेगा जिनके पास इस प्रकार का अत्याधुनिक समुद्री निगरानी पोत है। इस प्रकार के पोत वर्तमान में अमेरिका, रूस, चीन और फ्रांस के पास हैं।

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