adel abdul mahdi

मुस्तफा अल कदीमी को इराक का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया

नवंबर 2019 में आदेल अब्दुल महदी के इस्तीफे के बाद मुस्तफा अल कदीमी को इराक के प्रधानमंत्री के रूप में चुना गया था। 7 मई, 2020 को इराक की संसद ने मुस्तफा कादिमी को इराक के नए प्रधानमंत्री के रूप में चुनने के लिए मतदान किया।

मुख्य बिंदु

नवंबर 2019 में बड़े पैमाने पर सरकार विरोधी प्रदर्शनों के कारण आदेल अब्दुल महदी ने इस्तीफा दे दिया। कादिमी के साथ 15 कैबिनेट मंत्रियों को भी संसद द्वारा अनुमोदित किया गया है और पांच को अस्वीकार कर दिया गया था।

मतदान के सत्र में 250 संसद सदस्यों ने भाग लिया। हालांकि, कुर्द राजनेताओं ने मतदान प्रक्रिया का बहिष्कार किया, जिसमें दावा किया गया कि कदीमी कुर्दों के सामने आने वाली चुनौतियों को नहीं समझते हैं। तेल संपन्न शहरों के सांसदों द्वारा भी इस सत्र का बहिष्कार किया गया।

अल कदीमी

अल कदीमी किसी राजनीतिक दल से संबंध नहीं रखते हैं। वह एक पूर्व खुफिया प्रमुख थे और अप्रैल में प्रधानमंत्री पद के लिए नामित किये गये थे। उन्हें इराक के राष्ट्रपति बरहम सलीह द्वारा नामित किया गया था।

वह सद्दाम हुसैन के मुखर विरोधी थे। 1985 में उन्होंने इराक छोड़ दिया था, वे कई वर्षों के लिए निर्वासन में ब्रिटेन में रहे।  कादिमी अल-मॉनिटर के लिए इराक पल्स के एक संपादक और स्तंभकार थे। 2005 में बनाए गए संविधान के आधार पर अल कदीमी को प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है।

इराक का संविधान

इराक का संविधान 1925 में लागू हुआ। यह 1958 तक लागू रहा। बाद में 1964, 1968 और 1970 में संविधान के तहत कई परिवर्तन किये गये। वर्तमान संविधान को 2005 में इराकी गवर्निंग काउंसिल द्वारा निर्मित किया गया था।

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देवेन्द्र फड़नवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया

महाराष्ट्र में देवेन्द्र फड़नवीस ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। उप-मुख्यमंत्री अजीत पवार ने भी अपने  पद से इस्तीफ़ा दे दिया है। इससे पहले देवेन्द्र फड़नवीस ने महाराष्ट्र के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले ली थी। जबकि एनसीपी के अजीत पवार महाराष्ट्र के उप-मुख्यमंत्री बन गये थे। शिवसेवा, एनसीपी और कांग्रेस ने इस शपथ ग्रहण को सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती दी है। शिवसेना ने 162 विधायकों का समर्थन प्राप्त होने का दावा किया है।

पृष्ठभूमि

विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी को चुनाव में 105 सीटें प्राप्त हुई। भाजपा के सहयोगी दल शिवसेना को 56 सीटें प्राप्त हुई। अतः महाराष्ट्र में भाजपा और शिवसेना के गठबंधन की सरकार बनने के आसार थे, परन्तु मुख्यमंत्री पद को लेकर दोनों दलों में सहमती नहीं बन सकी।

चुनावों में एनसीपी को 54 सीटें प्राप्त हुई हैं, जबकि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को 44 सीटें प्राप्त हुई हैं। एमएनएस को एक सीट प्राप्त हुई है, जबकि अन्य दलों को 28 सीटें प्राप्त हुई हैं।

महाराष्ट्र में विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं, इसमें 234 सीटें सामान्य वर्ग, 29 सीटें अनुसूचित जाती तथा 25 सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं।

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