Arunachal Pradesh

20 फरवरी : अरुणाचल प्रदेश तथा मिजोरम का स्थापना दिवस

20 फरवरी को अरुणाचल प्रदेश तथा मिजोरम का स्थापना दिवस मनाया जाता है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश तथा मिजोरम के लोगों को शुभकामनाएं दीं।

संक्षिप्त इतिहास

मिजोरम

मिजोरम की स्थापना के साथ मिज़ो नेशनल फ्रंट के संघर्ष का समापन हुआ, मिज़ो नेशनल फ्रंट की स्थापना 1961 में की गयी थी। इस संगठन ने ग्रेटर मिजोरम की स्वायत्त स्वतंत्रता की मांग के लिए हथियार उठाये और आइजोल, लुंगलेई, चान्गते, छिम्लुंग इत्यादि स्थानों में सरकारी संस्थानों को निशाना बनाया। भारत सरकार ने 1967 में मिज़ो नेशनल फ्रंट पर प्रतिबन्ध लगाया। इससे MNF के नेतृत्व में संघर्ष और भी तीव्र हुआ।  1972 में मिजोरम को केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया गया, परन्तु प्रदर्शनकारी इससे शांत नहीं हुए।

30 जून, 1986 को मिज़ो नेशनल फ्रंट तथा भारत सरकार ने समझौते पर हस्ताक्षर किये। इसके पश्चात् मिज़ो नेशनल फ्रंट ने हिंसा का मार्ग त्याग दिया और शीघ्र ही मिजोरम को भारत का पूर्ण राज्य बनाया गया। इसके इए मिजोरम राज्य अधिनियम, 1986 पारित किया गया था।

अरुणाचल प्रदेश

शुरू में असम का नियंत्रण असम की प्रांतीय सरकार के गवर्नर के पास था। संविधान लागू होने के बाद नार्थ ईस्ट फ्रंटियर एजेंसी (NEFA) का कार्यभार असम के राज्यपाल को सौंपा गया। बाद में NEFA का नाम बदलकर अरुणाचल प्रदेश कर दिया गया। 1972 में अरुणाचल प्रदेश केंद्र शासित प्रदेश बना। 1975 में अरुणाचल प्रदेश परिषद् को अस्थायी विधानसभा में परिवर्तित किया गया तथा इसमें अरुणाचल प्रदेश के लिए मंत्रिपरिषद का गठन किया गया। 20 फरवरी, 1987 को अरुणाचल प्रदेश को पूर्ण राज्य का दर्जा दिया गया, इसके लिए संविधान में 55वां संशोधन किया गया था।

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अरुणाचल प्रदेश में किया गया प्रथम कृषि अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन

अरुणाचल प्रदेश में प्रथम कृषि अंतर्राष्ट्रीय क्रेता-विक्रेता सम्मेलन का आयोजन किया गया। इसका आयोजन APEDA (कृषि और प्रसंस्‍कृत खाद्य उत्‍पाद निर्यात विकास प्राधिकरण) द्वारा किया गया।

मुख्य बिंदु

  • इस इवेंट में सात देशों (नेपाल भूटान, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, भूटान, ,संयुक्त अरब अमीरात, ओमान तथा ग्रीस) के क्रेताओं ने हिस्सा लिया।
  • इस इवेंट में अरुणाचल प्रदेश के उत्पादों को प्रदर्शित किया है। इसमें कीवी, बड़ी इलायची, पाइनएप्पल, मसाले, फूल इत्यादि शामिल हैं।

महत्व

इस इवेंट का उद्देश्य अरुणाचल प्रदेश के कृषि उत्पादों को बढ़ावा देना था। इसके द्वारा निर्यातक तथा अंतर्राष्ट्रीय आयातकों को एक प्लेटफार्म उपलब्ध हो सका। अरुणाचल का 75% से 80% भूमि अनन्वेषित है। अरुणाचल प्रदेश में पांच प्रकार के कृषि-जलवायु जोन हैं, इसमें बागवानी फसलों के लिए काफी संभावनाएं हैं।

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