CBDT

पी.के. दश, अखिलेश रंजन और नीना कुमारी को केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड का सदस्य नियुक्त किया गया

पी.के. दश, अखिलेश रंजन और नीना कुमारी को केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड का नया सदस्य नियुक्त किया गया। यह तीनों भारतीय राजस्व सेवा (IRS) के 1982 बैच के अफसर हैं। पी.के. दश भोपाल में आयकर विभाग के  प्रधान चीफ कमीशनर के रूप में कार्यरत्त थे, जबकि अखिलेश रंजन और नीना कुमार दिल्ली में कार्यरत्त थे। इन तीन नयी नियुक्तियों के साथ केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड की क्षमता पूर्व हो गयी है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड में अब 5 सदस्य तथा एक चेयरमैन हैं। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के दो अन्य सदस्य IRS अफसर आदित्य विक्रम तथा पी.सी. मोदी हैं। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन सुशिल चन्द्र हैं।

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT)

केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड आयकर विभाग की नीति निर्माण के लिए नोडल एजेंसी है, आयकर विभाग केन्द्रीय वित्त मंत्रालय के अधीन कार्य करता है। यह एक संवैधानिक संस्था है, इसकी स्थापना केन्द्रीय राजस्व बोर्ड अधिनियम, 1963 के अंतर्गत की गयी है। प्रत्यक्ष कर नीति निर्माण के सन्दर्भ में यह देश की सर्वोच्च संस्था है, यह बोर्ड देश में प्रत्यक्ष कर कानून प्रवर्तन के लिए भी उत्तरदायी है।

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केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने प्रत्यक्ष कर के आंकड़े जारी किये

हाल ही में केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने प्रत्यक्ष कर के आंकड़े जारी किये।  इन आंकड़ों के अनुसार देश में करदाताओं की संख्या व कर राशि में काफी वृद्धि हुई है।

मुख्य बिंदु

इन आंकड़ों के अनुसार पिछले तीन वर्षों में प्रत्यक्ष कर तथा जीडीपी अनुपात में वृद्धि हुई है, वित्त वर्ष 2017-18 में यह अनुमान 5.98 % रहा। पिछले चार वर्षों में आयकर रेतुर्न की संख्या में 80% से अधिक की वृद्धि हुई है। वित्त वर्ष 2013-14 के 3.79 करोड़ से बढ़कर आयकर रीटर्न की संख्या 2017-18 में 6.85 करोड़ हो गयी है।

पिछले तीन वर्षों में आयकर रीटर्न में कुल आमदनी 26.92 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 44.88 लाख करोड़ रूपए हो गयी है। इसमें 67% की वृद्धि हुई है। कर निर्धारण वर्ष 2014-15 में 88,649 करदाताओं की आय 1 करोड़ रुपये से अधिक थी, कर निर्धारण वर्ष 2017-18 में यह आंकड़ा 1,40,139 पर पहुँच गया है। इसमें 60% की वृद्धि हुई है।

कर निर्धारण वर्ष 2014-15 में औसत कॉर्पोरेट करदाता का कर 32.28 लाख रूपए था, कर निर्धारण वर्ष 2017-18 में यह बढ़कर 49.95 लाख रुपये हो गया।

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