CSR

BHEL के सहयोग से भारतीय रेलवे द्वारा विश्व में अपनी तरह की पहली परियोजना कमीशन की गयी

अपनी कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) योजना के तहत, भारत में सबसे बड़ी बिजली उत्पादन उपकरण निर्माता- भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) ने मध्य प्रदेश के बीना जिले में 1.7 मेगावाट की सौर ऊर्जा परियोजना स्थापित करने के लिए भारतीय रेलवे के साथ एक परियोजना शुरू की थी। यह भारतीय रेलवे के ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम से सीधे जुड़ेगा। भारतीय रेल और BHEL के बीच सौर ऊर्जा परियोजना पर 9 अक्टूबर, 2019 को हस्ताक्षर किये गये थे।

सौर ऊर्जा परियोजना को 6 जुलाई, 2020 को पूरा किया गया, और वर्तमान में इसका व्यापक परीक्षण किया जा रहा है। इस सौर ऊर्जा परियोजना के 15 दिनों के भीतर चालू होने की उम्मीद है। यह सौर ऊर्जा परियोजना दुनिया का पहला सौर ऊर्जा संयंत्र है जिसमें संयंत्र से उत्पन्न बिजली को सीधे रेलवे के ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम को प्रदान किया जाएगा।

चुनौतियां

परियोजना में प्रमुख चुनौती यह थी कि भारतीय रेलवे लोकोमोटिव को बिजली देने के लिए अपने ओवरहेड ट्रैक्शन सिस्टम में सिंगल फेज 25 केवी एसी (अल्टरनेटिंग करंट) का उपयोग करता है, जबकि सौर ऊर्जा संयंत्र में सौर पैनल डीसी (डायरेक्ट करंट) पावर का उत्पादन करता है। इसलिए सोलर पैनल्स से डीसी पावर को एसी पावर में बदलना पड़ा।

डीसी में एसी पावर में परिवर्तित करने के लिए एकल-चरण आउटपुट वाले उच्च क्षमता वाले इनवर्टर स्थापित किए गए थे। टीएसएस (भारतीय रेलवे के ट्रैक्शन सब स्टेशन) को सीधे बिजली देने के लिए, ट्रांसफॉर्मर के माध्यम से 25 केवी एसी को इनवर्टर से ऊपर ले जाया जा रहा है।

परियोजना के लाभ

यह सौर ऊर्जा संयंत्र भारतीय रेलवे के लिए एक वर्ष में 1.37 करोड़ रुपये बचाएगा। भारतीय रेलवे के लिए सौर ऊर्जा संयंत्र द्वारा हर साल लगभग 25 लाख यूनिट ऊर्जा का उत्पादन किया जाएगा।

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कैबिनेट ने कंपनी अधिनियम, 2013 में संशोधन के लिए मंज़ूरी दी

4 मार्च, 2020 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कंपनी अधिनियम, 2013 में 72 बदलावों को मंजूरी दी।

मुख्य बिंदु

इन संशोधन का उद्देश्य 23 अपराधों को पुनः श्रेणीबद्ध करना है।  संशोधन के तहत 50 लाख रुपये से कम कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) की बाध्यता वाली कंपनियों को एक CSV समिति का गठन करने की आवश्यकता नहीं होगी।

धारा 129 A

फाइलिंग को अधिक वैज्ञानिक बनाने के लिए इस अधिनियम में संशोधन किया जायेगा। इसके लिए एक नई धारा 129 A को शामिल किया जायेगा, जो समय-समय पर गैर-सूचीबद्ध कंपनियों (अधिनियम के तहत) के परिणाम दर्ज करेगी।

लाभ

इन संशोधनों से निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी, विशेष रूप से विदेशी निवेश। यह संशोधन घरेलू कंपनियों को विदेशी मुद्रा पर सूचीबद्ध करने की अनुमति देता है। वर्तमान में, भारतीय कंपनियों के पास केवल जीडीआर (ग्लोबल डिपॉजिटरी रसीद) और एडीआर (अमेरिकन डिपॉजिटरी रसीद) का ही विकल्प है।

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी (CSR)

कॉर्पोरेट सोशल रिस्पांसिबिलिटी नामक पहल की शुरुआत पर्यावरण तथा सामाजिक कल्याण कार्यों में कंपनियों के स्वेच्छिक योगदान के लिए की गयी थी। इसका मुख्य सिद्धांत यह है कि कंपनियां समाज से ही आय प्राप्त करती हैं अतः उन्हें भी समाज के लिए कुछ योगदान देना चाहिए।

कंपनी अधिनियम, 2013 के सेक्शन 135 में CSR की व्यवस्था की गयी है। मौजूदा नियम के तहत CSR के बारे में निर्णय लेने की शक्ति कंपनी के बोर्ड को दी गयी है। इस नियम के अनुसार 500 करोड़ रुपये शुद्ध मूल्य अथवा 1000 करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर अथवा 5 करोड़ से अधिक शुद्ध लाभ करने वाली कंपनी को पिछले तीन वर्षों के शुद्ध लाभ के औसत का 2% CSR सम्बन्धी कार्यों के लिए खर्च करना पड़ता है। CSR गतिविधियों का वर्णन सातवीं अनुसूची में है।

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