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रक्षा अधिग्रहण परिषद् की बैठक का आयोजन किया गया

21 अक्टूबर, 2019 को रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने रक्षा अधिग्रहण परिषद् की अध्यक्षता की। इस परिषद् का उद्देश्य सशस्त्र बलों के लिए खरीद की आवश्यकताओं को पूर्ण करना सुनिश्चित करना है।

मुख्य बिंदु

  • रक्षा अधिग्रहण परिषद् ने स्वदेशी रूप से निर्मित उपकरणों की सुरक्षा बलों के लिए 3300 करोड़ रुपये की खरीद को मंज़ूरी दी।
  • परिषद् ने स्वदेशी रूप से उपकरणों के निर्माण के लिए तीन परियोजनाओं को मंज़ूरी दी।
  • इन परियोजनाओं में पहली दो परियोजनाएं ATGM-एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल तथा T-72 तथा T-90 टैंक के लिए APU-औक्सिलिअरी पॉवर यूनिट्स के निर्माण से सम्बंधित हैं। इससे निजी क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा।
  • तीसरी परियोजना इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम से सम्बंधित है। इसका निर्माण DRDO द्वारा किया जायेगा।

रक्षा अधिग्रहण परिषद

11 अक्टूबर 2001 को देश की रक्षा एवं सुरक्षा में सुधार हेतु की जाने वाली खरीद और अधिग्रहण के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद की स्थापना की गई। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) रक्षा मंत्रालय के तहत एक व्यापक संरचना, रक्षा खरीद योजना प्रक्रिया के समग्र मार्गदर्शन के लिए गठित की गई थी।

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रक्षा अधिग्रहण परिषद् ने नौसेना के लिए 2 ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल बैटरी खरीदने के लिए मंज़ूरी दी

रक्षा अधिग्रहण परिषद् ने नौसेना के लिए सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (SDR टैक्टिकल) तथा नेक्स्ट जनरेशन मेरीटाइम मोबाइल कोस्टल बैटरीज (NGMMCB-Long Range) खरीदने के लिए मंज़ूरी दी। यह निर्णय रक्षा अधिग्रहण परिषद् की बैठक में लिया गया, यह राजनाथ सिंह के रक्षा मंत्री बनने की बाद की पहली बैठक थी। स्वदेशी रूप से निर्मित यह दोनों उपकरण नवीनतम पीढ़ी के हैं।

मुख्य बिंदु

सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो (SDR टैक्टिकल) : यह एक जटिल व आधुनिकतम संचार प्रणाली है, इसका विकास DRDO, BEL और वेपन इलेक्ट्रॉनिक्स सिस्टम इंजीनियरिंग एस्टाब्लिश्मेंट (WESEE) द्वारा किया गया है। इसके द्वारा सुरक्षित संचार किया जा सकता है, इसमें एंटी-जैमिंग क्षमता भी है।

नेक्स्ट जनरेशन मेरीटाइम मोबाइल कोस्टल बैटरीज (NGMMCB-Long Range) : इसका निर्माण भारत में रूस और भारत की जॉइंट वेंचर कम्पनी ब्रह्मोस एयरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया गया है। इसे सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस में उपयोग किया जायेगा।

रक्षा अधिग्रहण परिषद

11 अक्टूबर 2001 को देश की रक्षा एवं सुरक्षा में सुधार हेतु की जाने वाली खरीद और अधिग्रहण के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद की स्थापना की गई। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) रक्षा मंत्रालय के तहत एक व्यापक संरचना, रक्षा खरीद योजना प्रक्रिया के समग्र मार्गदर्शन के लिए गठित की गई थी।

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