DRDO

भारतीय नौसेना ने किया MRSAM मिसाइल का परीक्षण

भारतीय नौसेना ने हाल ही में MRSAM मिसाइल (मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार कर सकने वाली मिसाइल) का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण भारतीय नौसेना, रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन व इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज द्वारा मिलकर किया गया। DRDO ने इस मिसाइल विकास संयुक्त रूप से इजराइल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर किया है। इस मिसाइल को भारत डायनामिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित किया गया है। इस मिसाइल को कलकत्ता श्रेणी डिस्ट्रॉयर के में फिट किया जा सकता है।

मुख्य बिंदु

इस मिसाइल प्रणाली से हवाई, समुद्री तथा ज़मीनी खतरों से बड़ी आसानी से निपटा जा सकता है। इस मिसाइल प्रणाली में डिजिटल राडार, कमांड एंड कण्ट्रोल, लांचर तथा इंटरसेप्टर्स होते हैं। इसका निर्माण इजराइल के रक्षा मंत्रालय, भारत के रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO), राफेल तथा एल्टा सिस्टम्स के बीच सहयोग से बनाया गया है।

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DRDO ने अभ्यास ड्रोन की उड़ान का सफल परीक्षण किया

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) ने “अभ्यास” (ABHYAS – High-speed Expendable Aerial Target) नामक ड्रोन की उड़ान का सफल परीक्षण किया। यह परीक्षण ओडिशा  के बालासोर में चांदीपुर इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में किया गया। इस ड्रोन में इन-लाइन स्माल गैस टरबाइन इंजन का इस्तेमाल किया गया, इसमें स्वदेशी रूप से निर्मित MEMS बेस्ड नेविगेशन प्रणाली का उपयोग किया गया है।

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO)

रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) की स्थापना 1958 में की गयी थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली के DRDO भवन में स्थित है। यह भारत सरकार की एजेंसी है। यह सैन्य अनुसन्धान तथा विकास से सम्बंधित कार्य करता है। DRDO का आदर्श वाक्य “बलस्य मूलं विज्ञानं” है। DRDO में 30,000 से अधिक कर्मचारी कार्य करते हैं। वर्तमान में DRDO के चेयरमैन डॉ. जी. सतीश रेड्डी हैं। DRDO का नियंत्रण केन्द्रीय रक्षा मंत्रालय के पास है। DRDO की 52 प्रयोगशालाओं का नेटवर्क है।

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