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DRDO ने गणतंत्र दिवस परेड में A-SAT हथियार प्रणाली को प्रदर्शित किया

26 जनवरी, 2020 को गणतंत्र दिवस परेड में रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन (DRDO) A-SAT (Anti-Satellite Weapon System) हथियार प्रणाली को प्रदर्शित किया। भारत विश्व के चुनिन्दा देशों में से एक है जिनके पास इस किस्म की टेक्नोलॉजी है, भारत के अलावा यह टेक्नोलॉजी केवल अमेरिका, चीन और रूस के पास है।

मिशन शक्ति

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 27 मार्च, 2019 को संबोधन में प्रकट किया था कि भारत ने अपनी पहली एंटी-सैटेलाइट मिसाइल ने अन्तरिक्ष में उपग्रह को सफलतापूर्वक नष्ट किया  है।

  • इस मिशन को “मिशन शक्ति” नाम दिया गया था। इस मिशन में मिसाइल ने पृथ्वी की निम्न कक्षा में सैटेलाइट को नष्ट किया गया।
  • यह कार्य लांच के केवल तीन मिनट बाद ही पूरा कर लिया गया। यह भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।
  • इस मिशन का नेतृत्व रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन द्वारा किया गया।
  • टारगेट सैटेलाइट 300 किलोमीटर की ऊंचाई पर परिक्रमा कर रहा था।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट किया कि भारत का यह मिशन किसी दूसरे देश के विरुद्ध नहीं है। इस मिशन को पूरा करने के लिए किसी अंतर्राष्ट्रीय कानून अथवा संधि का उल्लंघन नहीं किया गया है।
  • यह बेहद जटिल मिशन था, गौरतलब है कि मिसाइल ने तीव्र गति तथा उत्तम सटीकता से अपने लक्ष्य को ध्वस्त किया।
  • भारत अन्तरिक्ष में सैटलाइट को मार गिराने वाले विश्व का चौथा देश है, अब तक केवल अमेरिका, रूस और चीन ही यह कारनामा कर पाए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय संधि

भारत ने 1976 बाह्य अन्तरिक्ष नामक अंतर्राष्ट्रीय संधि पर हस्ताक्षर किये हैं, इस संधि के तहत बाह्य अन्तरिक्ष में बड़े स्तर के  विनाशकारी हथियारों पर प्रतिबन्ध है।

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रक्षा मंत्रालय ने 5,100 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों की खरीद को मंज़ूरी दी

22 जनवरी, 2020 को रक्षा अधिग्रहण परिषद् ने 5,100 करोड़ रुपये के रक्षा उपकरणों की खरीद को मंज़ूरी दी। यह उपकरण स्वदेश स्त्रोतों से खरीदे जायेंगे।

मुख्य बिंदु

इन उपकरणों में DRDO द्वारा निर्णित इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम भी शामिल हैं। इसके अलावा बाकी उपकरणों का निर्माण भारतीय उद्योगों द्वारा ही किया गया है।

इसके अलावा रक्षा अधिग्रहण परिषद् ने भारतीय सामरिक साझेदारों की शार्टलिस्ट को भी मंज़ूरी दी है। यह साझेदार मूल उपकरण निर्माता (OEM) के साथ मिलकर 6 पनडुब्बियों का निर्माण करेंगे। इसमें निजी फर्में हिस्सा ले सकेंगी।

रक्षा अधिग्रहण परिषद् ने iDEX (Innovations Defence Exellence) को रक्षा खरीद प्रक्रिया में शामिल करने के लिए मंज़ूरी दी है।

iDEX

iDEX (Innovations Defence Exellence) को अप्रैल, 2018 में लांच किया गया था, इसका उद्देश्य रक्षा व एयरोस्पेस क्षेत्र में प्रौद्योगिकी विकास को बढ़ावा देना है। इसके लिए HAL तथा BEL द्वारा गठित रक्षा नवोन्मेष संगठन द्वारा फण्ड मुहैया किये जाते हैं।

रक्षा अधिग्रहण परिषद

11 अक्टूबर 2001 को देश की रक्षा एवं सुरक्षा में सुधार हेतु की जाने वाली खरीद और अधिग्रहण के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद की स्थापना की गई। रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) रक्षा मंत्रालय के तहत एक व्यापक संरचना, रक्षा खरीद योजना प्रक्रिया के समग्र मार्गदर्शन के लिए गठित की गई थी।

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