Emisat

EMISAT से भारत की रक्षा क्षमता में वृद्धि होगी

हाल ही में इसरो ने EMISAT (इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटेलिजेंस सैटेलाइट) लांच किया, इससे भारत की रक्षा क्षमता में वृद्धि होगी।

EMISAT

  • EMISAT को इसरो तथा DRDO ने मिलकर विकसित किया है।
  • EMISAT के द्वारा भारत दुश्मन देश के राडार को इंटरसेप्ट कर सकता है।
  • इससे भारत की सामरिक क्षमता में वृद्धि होगी। भारतीय सशस्त्र बल दुश्मन देश के राडार सिग्नल को इंटरसेप्ट कर पायेंगे।
  • इससे भारतीय रक्षा बलों को यह पता चल सकेगा कि सीमा की दूसरी तरफ किस प्रकार के राडार लगे हुए हैं। इस सैटेलाइट से दुश्मन देश के राडार तथा भारतीय परिसंपत्ति के बीच की दूरी का पता भी लगाया जा सकता है।
  • इस सैटेलाइट को पृथ्वी की निम्न कक्षा में लगभग 700 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया है, यह कम उर्जा वाले राडार सिग्नल को भी पकड़ सकता है। इन राडार का उपयोग एयरक्राफ्ट तथा ड्रोन जैसे उपकरणों को ट्रैक करने के लिए किया जाता है।

इस सैटेलाइट का विकास प्रोजेक्ट कौटिल्य के तहत किया गया है, इसे 2013-14 में स्वीकृति दी गयी है, परन्तु DRDO ने इस मिशन को गुप्त रखा हुआ था।

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PSLV C-45 : इसरो ने एक साथ लांच किये 29 उपग्रह

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने 1 अप्रैल को एक ही लांच में 29 सैटेलाइट प्रक्षेपित किये। इसरो ने 1 अप्रैल, 2019 को 436 किलोग्राम भार वाले एमिसैट उपग्रह को रक्षा अनुसन्धान व विकास संगठन के लिए लांच किया। इसके साथ अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के 28 सैटेलाइट्स भी श्रीहरिकोटा से लांच किये गये। एमिसैट को 753 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किया गया। इस उड़ान में लिथुआनिया, स्पेन, स्विट्ज़रलैंड तथा अमेरिका के सैटेलाइट भी अन्तरिक्ष में स्थापित किये गये, यह सैटेलाइट 505 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थापित किये गये। यह लांच PSLV C-45 द्वारा किया गया।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए।

80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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