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नासा-ESA ने सूर्य के ध्रुवों की मैपिंग के लिए लांच किया ऑर्बिटर

अमेरिकी अन्तरिक्ष एजेंसी नासा और यूरोपीय अंतिरक्ष एजेंसी (ESA) ने सूर्य के ध्रुवों की मैपिंग के लिए ऑर्बिटर लांच किया है। इस ऑर्बिटर को 9 फरवरी, 2020 को लांच किया गया।

मुख्य बिंदु

यह ऑर्बिटर पृथ्वी तथा शुक्र ग्रह की गुरुत्वाकर्षण शक्ति का उपयोग करके सूर्य से 26 मिलियन मील की दूरी पर स्वयं को स्थापित करेगा। यह ऑर्बिटर पहली बार सूर्य के ध्रुवों का मानचित्रण करेगा।

इस सोलर ऑर्बिटर का निर्माण यूरोप और अमेरिका के लगभग 1000 वैज्ञानिकों ने किया है। इस ऑर्बिटर का भार लगभग 1800 किलोग्राम है। यह 2021 के अंत तक पूर्ण रूप से कार्य करना शुरू कर देगा। नासा ने इससे पहले सूर्य के अध्ययन के लिए पार्कर सोलर प्रोब मिशन को भी लांच किया था।

पार्कर सोलर प्रोब

इस मिशन को यूनाइटेड लांच अलायन्स डेल्टा IV हैवी राकेट की सहायता से लांच किया गया। इस स्पेसक्राफ्ट का भार 635 किलोग्राम है। इस मिशन का कार्यकाल 7 वर्ष का होगा, इस दौरान पार्कर सोलर प्रोब सूर्य की 24 परिक्रमाएँ करेगा। सूर्य के तापमान से स्पेसक्राफ्ट को बचाने के लिए इसमें एक शील्ड लगायी गयी है, यह शील्ड 1,650 डिग्री तक का तामपान सहन कर सकती है। इसके अतिरिक्त इस स्पेसक्राफ्ट के उपकरणों को भी अधिक तापमान से बचाने के लिए विशेष सामग्री से बनाया गया है। यह स्पेसक्राफ्ट दिसम्बर से वैज्ञानिक सूचनाएं भेजना शुरू करेगा।

इस स्पेसक्राफ्ट सूर्य के सबसे नज़दीक लगभग 6.2 मिलियन किलोमीटर नज़दीक जायेगा, यह अधिकतम 7,00,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से यात्रा करेगा, यह अपने आप में एक रिकॉर्ड होगा। इस प्रकार यह मानव निर्मित सबसे तेज़ गति से यात्रा करने वाला ऑब्जेक्ट होगा।

इस मिशन का नाम यूजीन पार्कर पर रखा गया थे, वे एक सौर भौतिकशास्त्री थे। उन्होंने वर्ष 1958 में सोलर विंड के अस्तित्व के बारे में बताया था।

उद्देश्य

  • सूर्य के कोरोना से उर्जा के बहाव और सोलर विंड का अध्ययन करना
  • सोलर विंड के स्त्रोत पर चुम्बकीय क्षेत्र की संरचना का अध्ययन करना
  • उर्जा कणों के परिवहन के मैकेनिज्म का पता लगाना

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रूस ने “फेडोर” नामक रोबोट को अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए भेजा

रूस ने हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन के लिए कजाखस्तान के बैकोनुर से एक राकेट लांच किया है, इस राकेट में “फेडोर” नामक रोबोट को भेजा गया है। यह रूस द्वारा अन्तरिक्ष में भेजा गया पहला रोबोट है। “फेडोर” की ऊंचाई एक मीटर 80 सेंटीमीटर है (5 फीट 11 इंच) । इसका भार 160 किलोम्ग्राम है। इस रोबोट का उपयोग नई आपातकालीन बचाव प्रणाली का परीक्षण करना है। अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन में 10 दिन तक “फेडोर” नए कौशल सीखेगा, यह इलेक्ट्रिक केबल को स्क्रूड्राइवर की सहायता से कनेक्ट तथा डिसकनेक्ट करने जैसे कार्य भी करेगा।

अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (ISS)

अंतर्राष्ट्रीय अन्तरिक्ष स्टेशन (ISS) पृथ्वी की निम्न कक्षा में एक आवासीय कृत्रिम उपग्रह है। यह पृथ्वी से 330 से 435 किलोमीटर की ऊंचाई पर है। यह 92 मिनट में पृथ्वी की एक परिक्रमा पूरी करता है। यह एक दिन में 15.5 बार पृथ्वी की परिक्रमा करता है। ISS कार्यक्रम पांच अन्तरिक्ष एजेंसियों नासा (अमेरिका), रोसकॉसमॉस (रूस), जाक्सा (जापान), ESA (यूरोप) तथा CSA (कनाडा) का संयुक्त कार्यक्रम है।

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