Global Snow Leopard and Ecosystem Protection Program

देश में बर्फीले तेंदुए की जनगणना के लिए प्रथम राष्ट्रीय प्रोटोकॉल को लांच की गयी

अंतर्राष्ट्रीय बर्फीला तेंदुआ दिवस 2019 के अवसर पर केन्द्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने देश में बर्फीले तेंदुए की जनगणना के लिए प्रथम राष्ट्रीय प्रोटोकॉल को लांच किया। इसे दिल्ली में Global Snow Leopard and Ecosystem Protection Program (GSLEP) की चौथी स्टीयरिंग कमिटी बैठक में लांच किया गया।

प्रतिवर्ष 23 अक्टूबर को अंतर्राष्ट्रीय बर्फीला तेंदुआ दिवस मनाया जाता है, इस दिवस का उद्देश्य हिमालयी क्षेत्र में बर्फीले तेंदुए के संरक्षण पर बल देना है। अनुमानों के अनुसार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में बर्फीले तेंदुए की जनसँख्या 400 से 700 के बीच है।

बर्फीला तेंदुआ (स्नो लेपर्ड)

बर्फीला तेंदुआ मध्य व दक्षिण एशिया तथा रूस के अल्ताई पर्वत में पाया जाता है। यह आमतौर पर 3000 से 4,500 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। यह अपने भोजन के लिए मुख्य रूप से वन्य जीवों पर निर्भर होता है। भारत में यह जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, सिक्किम व अरुणाचल प्रदेश पाया जाता है। अत्याधिक शिकार व आवास के नाश के कारण इसका अस्तित्व खतरे में हैं।

बर्फीले तेंदुए को वन्यजीव (सुरक्षा) अधिनियम, 1972 की प्रथम अनुसूची, अंतर्राष्ट्रीय विलुप्तप्राय प्रजातियों के व्यापार पर सम्मेलन (CITES) के प्रथम परिशिष्ट तथा प्रवासी प्रजाति सम्मेलन (CMS) के प्रथम परिशिष्ट में विलुप्तप्राय प्रजाति के रूप में शामिल किया गया है। सितम्बर, 2017 में अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) ने बर्फीले तेंदुए के स्टेटस को विलुप्तप्राय से बदलकर संकटग्रस्त किया गया है। बर्फीला तेंदुआ पाकिस्तान और अफ़ग़ानिस्तान का राष्ट्रीय विरासत पशु भी है।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , , , ,

Advertisement