GSI

भारत में किया जाएगा अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस 2020 का आयोजन

भारत में मार्च 2020 के पहले सप्ताह में 36वीं अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस का आयोजन किया जाएगा। अगले वर्ष के लिए अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस की थीम ‘भूविज्ञान : सतत विकास के लिए आधारभूत विज्ञान’ है।

अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस

अंतर्राष्ट्रीय भूवैज्ञानिक कांग्रेस को ‘भूविज्ञान का ओलिंपिक’ भी कहा जाता है। यह एक प्रतिष्ठित वैश्विक भूवैज्ञानिक इवेंट है, इसका आयोजन प्रत्येक चार वर्ष में एक बार किया जाता है। इसमें 5000-6000 वैज्ञानिक हिस्सा लेते हैं।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (GSI)

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना 1851 में की गयी थी।  यह संगठन भारत में भू-सर्वेक्षण तथा अध्ययन का कार्य करता है। इसका मुख्यालय कलकत्ता में स्थित है। इसकी स्थापना आरम्भ में ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा की गयी थी। इसकी स्थापना का उद्देश्य भारत के पूर्वी हिस्से में कोयला क्षेत्रों की खोज करना था। वर्तमान में बिपुल पाठक GSI के कार्यवाहक महानिदेशक हैं।

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अरुणाचल प्रदेश में मौजूद है भारत का 35% ग्रेफाइट भण्डार : GSI रिपोर्ट

जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का 35% ग्रेफाइट भंडार अरुणाचल प्रदेश में मौजूद है, यह अब तक खोजी गयी ग्रेफाइट की सर्वाधिक मात्रा है।

मुख्य बिंदु

हाल ही में जियोलाजिकल सर्वे ऑफ़ इंडिया द्वारा अरुणाचल प्रदेश के ईटानगर में इस डाटा को प्रस्तुत किया। वर्तमान में भारत अन्य देशों से ग्रेफाइट का आयात करता है। अरुणाचल प्रदेश में भारत का 35% ग्रेफाइट भंडार मिलने के बाद अरुणाचल प्रदेश को देश का अग्रणी ग्रेफाइट उत्पादक राज्य बनाया जा सकता है, इससे देश की ग्रेफाइट आवश्यकता को भी पूर्ण किया जा सकता है। इस ग्रेफाइट के उत्पादन के लिए ड्रिलिंग भारत-चीन अंतर्राष्ट्रीय सीमा की ओर की जायेगी।

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण (Geological Survey of India)

भारतीय भू-वैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना 1851 में की गयी थी, शुरू में इसकी स्थापना रेलवे के लिए कोयले के भंडार खोजने के लिए की गयी थी। वर्षों के पश्चात् अब GSI भूविज्ञान सूचना का एक विशाल भंडार बन गया है। यह एक अंतर्राष्ट्रीय स्तर के भू-विज्ञानिक संगठन के रूप में उभर कर आया है।

यह संगठन केन्द्रीय खनन मंत्रालय के साथ कार्य करता है। यह राष्ट्रीय भू-विज्ञानिक सूचना का एकत्रीकरण तथा अपडेट करने का कार्य करता है। यह ज़मीनी सर्वेक्षण, हवाई व समुद्री सर्वेक्षण के द्वारा खनिज संसाधन का आकलन करता है। इसके अतिरिक्त यह भूकंप गतिविधियों का अध्ययन, प्राकृतिक आपदा का अध्ययन, हिमखंड विज्ञान इत्यादि विभिन्न विषयों पर अध्ययन करता है।

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