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अगले पांच वर्षों में इसरो लांच करेंगा कम लागत वाले उपग्रह लांच व्हीकल

भारतीय अन्तरिक्ष  अनुसन्धान संगठन (इसरो) अगले पांच वर्षों में 30-35 करोड़ रुपये की लागत वाले लांच व्हीकल के निर्माण पर कार्य कर रहा है, यह लांच व्हीकल 500 किलोग्राम तक के उपग्रह को अन्तरिक्ष में ले जा सकते हैं।

मुख्य बिंदु

इसरो इस प्रकार के लांच व्हीकल का निर्माण तीन सप्ताह में कर सकता है। इसके लिए इसरो ने 1600 मिलियन डॉलर आबंटित किये हैं। इसमें से 870 मिलियन डॉलर का उपयोग PSLV (Polar Satellite Launch Vehicle) के उत्पादन के लिए किया जाएगा। जबकि शेष राशि का उपयोग GSLV (Geosynchronous Satellite Launch Vehicle) के लिए किया जाएगा।

इसरो यूनाइटेड किंगडम और फ्रांस की अन्तरिक्ष एजेंसियों के साथ मिलकर कार्य करने की योजना बना रहा है। जनवरी, 2020 में UK Space Trade Mission सहयोग के क्षेत्र की खोज करने के उद्देश्य से भारत आया था।

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IDRSS : इसरो का नया उपग्रह करेगा गगनयान क्रू की मदद

इसरो का नया उपग्रह IDRSS (Indian Data Relay Satellite System) पृथ्वी की निम्न कक्षा में भारतीय उपग्रहों को ट्रैक करेगा। यह एक नई उपग्रह श्रृंखला है जो अन्तरिक्ष में भारत की परिसंपत्तियों के बीच संचार स्थापित करेगा।

मुख्य बिंदु

यह उपग्रह श्रृंखला भारत के स्पेस स्टेशन तथा स्पेस डॉकिंग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे भारत के मंगल, शुक्र तथा चन्द्रमा मिशन में भी सहायता मिलेगी। इससे लांच को मॉनिटर करने में सहायता मिलेगी। भारत के मानव अन्तरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान में यह उपग्रह श्रृंखला महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

IDRSS उपग्रहों को GSLV लांचर की सहायता से लांच किया जाएगा, इन उपग्रहों का भार 2000 किलोग्राम होगा। इन उपग्रहों को पृथ्वी की कक्षा में 36,000 किलोमीटर की उंचाई पर स्थापित किया जायेगा।

IDRSS

इस मिशन में दो से अधिक उपग्रह लांच किये जायेंगे, पहले दो IDRSS उपग्रह को 2020 के अंत में लांच किया जाएगा। इस उपग्रहों को गगनयान के प्रायोगिक मिशन से पहले लांच किया जाएगा।

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