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हीना जैसवाल बनीं भारतीय वायुसेना की पहली महिला फ्लाइट इंजिनियर

हीना जैसवाल भारतीय वायुसेना में पहली महिला फ्लाइट इंजिनियर बन गयी हैं। अब तक भारतीय वायुसेना के फ्लाइट इंजिनियर केवल पुरुष ही थे। महिलाओं के लिए फ्लाइट इंजिनियर शाखा को 2018 में खोला गया था।

फ्लाइट लेफ्टिनेंट हीना जैसवाल को भारतीय वायुसेना की इंजीनियरिंग शाखा में जनवरी, 2015 में शामिल किया गया था। हीना जैसवाल भारतीय वायुसेना की ऑपरेशन हेलीकाप्टर यूनिट में तैनात किया जायेगा। यह हेलीकाप्टर सिअचीन ग्लेशियर तथा अंदमान जैसे मुश्किल क्षेत्रों में कार्य करते हैं।

फ्लाइट इंजिनियर एयरक्राफ्ट के फ्लाइट क्रू का सदस्य होता है, फ्लाइट इंजिनियर के पास मॉनिटरिंग तथा जटिल सिस्टम से सम्बंधित कौशल होना चाहिए।

फ्लाइट लेफ्टिनेंट हीना जैसवाल

फ्लाइट लेफ्टिनेंट हीना जैसवाल चंडीगढ़ से हैं, उन्होंने बैचलर ऑफ़ इंजीनियरिंग डिग्री यूनिवर्सिटी इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (UIET) पंजाब विश्वविद्यालय से प्राप्त की है।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन्दे भारत हाई स्पीड ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वन्दे भारत हाई स्पीड ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस रेलगाड़ी “ट्रेन 18” का नाम बदलकर “वन्दे भारत एक्सप्रेस” कर दिया गया है। यह रेलगाड़ी दिल्ली से वाराणसी के बीच चलेगी। 16 कोच वाली इस रेलगाड़ी का निर्माण भारत में ही पूर्ण रूप से  भारतीय इंजिनियरों द्वारा किया गया है।

इस विश्वस्तरीय रेल का किराया शताब्दी एक्सप्रेस से 40-50% अधिक हो सकता है। यह रेलगाड़ी 755 किलोमीटर की दूरी तय करेगी, यह ट्रेन कानपूर और प्रयागराज में रुकेगी।

ट्रेन 18 भारत की पहली बिना इंजन की ट्रेन है। इसका निर्माण चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में किया गया है। इस रेल के निर्माण में 100 करोड़ रुपये की लागत आई है। यह रेल 30 वर्ष पुरानी शताब्दी एक्सप्रेस का स्थान लेगी। इस रेल के 80% कल-पुर्ज़े भारत में निर्मित किये गये हैं, यह ट्रेन 160 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से दौड़ सकती है। 2019-20 तक इस प्रकार की 5 अन्य रेलों का निर्माण किया जायेगा।

मुख्य बिंदु

16 कोच वाले इस प्रोटोटाइप में लोकोमोटिव (इंजन) नहीं है, यह शताब्दी रेल की तुलना में 15% कम समय लेगी। ट्रेन 18 में सेल्फ-प्रोपल्शन मोड्युल का उपयोग किया गया है, यह ट्रेन 160 किलोमीटर की गति से यात्रा करने की क्षमता रखती है। इस ट्रेन में तीव्र गति के लिए नई तकनीकों का उपयोग किया गया है। इसके अतिरिक्त इस ट्रेन में आटोमेटिक द्वार तथा जीपीएस बेस्ड यात्री सूचना प्रणाली इत्यादि का उपयोग भी किया गया है।
इस रेलगाड़ी का 3-4 दिन तक परीक्षण किया जायेगा। परीक्षण के सफल होने के बाद इस प्रोटोटाइप को रिसर्च डिजाईन एंड स्टैंडर्ड्स आर्गेनाईजेशन (RDSO) को सौंपा जायेगा। शताब्दी ट्रेन को 1988 में शुरू किया गया था, फिलहाल यह 20 मार्गों पर कार्यरत्त है, यह मेट्रो शहरों को अन्य महत्वपूर्ण शहरों से जोड़ती है।

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