indian railways

भारतीय रेलवे ने पहले 12,000 एचपी इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव का परिचालन किया

9 मई, 2020 को भारतीय रेलवे ने पहले 12,000 एचपी इलेक्ट्रिक इंजन का परिचालन किया। इस लोकोमोटिव का निर्माण मेक इन इंडिया पहल के तहत फ्रांसीसी कंपनी एल्स्टॉम द्वारा किया गया था।

मुख्य बिंदु

इस लोकोमोटिव का निर्माण बिहार के मधेपुरा में इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव में किया गया है। यह 120 किमी/घंटा की अधिकतम गति पर 6,000 टन का भार उठाने में सक्षम है।

इस लोकोमोटिव का निर्माण 74% और 26% की भारतीय और फ्रांसीसी हिस्सेदारी के बीच एक संयुक्त उद्यम के रूप में किया गया है।

इसके साथ, भारत उच्च हॉर्स पॉवर लोकोमोटिव का उत्पादन करने वाला दुनिया का छठा देश बन गया है।

परियोजना

भारत-फ्रांसीसी परियोजना के तहत 2018-20 में लगभग 4 लोकोमोटिव वितरित किए जाने थे, 2019-20 में 35, 2020-21 में 60 और 11 साल की लंबी डिलीवरी के अंत तक हर साल 100 लोकोमोटिव डिलीवर किये जायेंगे। इस परियोजना को रेलवे क्षेत्र में सबसे बड़ा एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) माना जाता है।

यह ध्यान दिया जाना चाहिए कि भारतीय रेलवे ने भी 11 साल की अवधि के लिए 1000 डीजल लोकोमोटिव की आपूर्ति करने के लिए अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , ,

भारतीय रेलवे ने पहले वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट को कमीशन किया

पूर्व तटीय रेलवे ने सरकार के पहले वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट को कमीशन किया है। यह रेलवे का इस प्रकार का पहला प्लांट है जबकि भारत में यह इस प्रकार का कुल चौथा प्लांट है। यह प्लांट ई-वेस्ट और प्लास्टिक को 24 घंटे से कम समय में हल्के डीजल में परिवर्तित कर सकता है। हाल ही में इस प्लांट में इस्तेमाल के लिए ‘पालीक्रैक’ नामक तकनीक को पेटेंट किया गया है।

मुख्य बिंदु

यह प्लांट एकत्रित कचरे को पालीक्रैक टेक्नोलॉजी की सहायता से कार्बन पाउडर, डीजल व गैस में परिवर्तित कर सकता है। यह डीजल रेलवे द्वारा वाणिज्यिक उपयोग के लिए अन्य हितधारकों को बेचा जाएगा। जबकि गैस व कार्बन पाउडर का उपयोग ईंटो के निर्माण में किया जा सकता है। इस प्लांट की सबसे ख़ास बात यह है कि इस प्रक्रिया के अंत में किसी भी प्रकार का कचरा नहीं बचता।

यह प्लांट रोजाना 500 किलोग्राम कचरे को प्रोसेस कर सकता है, इससे रेलवे को प्रतिवर्ष 17.5 लाख रुए की कमाई होगी।

यह रेलवे द्वारा स्थापित किया गया पहला प्लांट है, परन्तु इस प्रकार के प्लांट देश में पहले से कार्य कर रहे हैं। सर्वप्रथम 2011 में आईटी कंपनी इनफ़ोसिस ने बंगलुरु में इस प्रकार के प्लांट की शुरुआत की थी। उसके बाद 2014 में दिल्ली में इस प्रकार का प्लांट शुरू किया गया। 2014 में हिंडाल्को द्वारा तीसरे प्लांट की स्थापना की गयी।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , , , ,

Advertisement