IOR

गोवा मेरीटाइम कॉन्क्लेव 2019

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोवाल ने गोवा मेरीटाइम कॉन्क्लेव का उद्घाटन किया। इस संगोष्ठी की थीम “Common Maritime Priorities in IOR and need for Regional Maritime Strategy” है। इस संगोष्ठी का मुख्य फोकस समुद्री चुनौतियों से निपटने के लिए हिन्द महासागर क्षेत्र (IOR)  की नौसेनाओं की क्षमता निर्माण पर था।

हिन्द महासागर क्षेत्र (IOR) महत्वपूर्ण क्यों है?

हिंदी महासागर क्षेत्र में टिन, सोना, यूरेनियम, कोबाल्ट, एल्युमीनियम, निकल तथा कैडमियम काफी मात्रा में उपलब्ध है। विश्व का 80% समुद्री व्यापार हिन्द महासागर से होकर गुज़रता है। इस क्षेत्र में आतंकवाद तथा समुद्री लुटेरों की समस्या है। इस क्षेत्र में भारत और चीन जैसे बड़े देश सामरिक विकास के लिए निरंतर कार्य कर रहे हैं।

हिन्द महासागर क्षेत्र (IOR) भारत के लिए महत्वपूर्ण क्यों है?

भारत का 70% तेल इस क्षेत्र से होकर आता है। भारत के लिसनिंग पोस्ट सेशल्स, मॉरिशस तथा मेडागास्कर में मौजूद है। चीन अपनी ‘स्ट्रिंग ऑफ़ पर्ल’ रणनीति से भारत को लगातार घेर रहा है, इसलिये भारत के लिए बहुत ज़रूरी है कि वह इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति को और अधिक मज़बूत करे।

समुद्री खतरे

  • समुद्री आतंकवाद : इस क्षेत्र से अवैध रूप से विस्फोटक ले जाये जाते हैं। गौरतलब है कि 1993 के मुंबई सीरियल ब्लास्ट के तथा 2008 के मुंबई हमले में इसी क्षेत्र से आतंकवादी भारत में आये थे।
  • पायरेसी : सोमालिया तथा अदेन की खाड़ी में समुद्री लुटेरे अक्सर हमला करते हैं, 2005 से 2012 के बीच यह हमले काफी अधिक थे।
  • अवैध व्यापार तथा मानव देह व्यापार
  • अवैध प्रवास तथा घुसपैठ

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नैरोबी में किया गया पहले सतत नीली अर्थव्यवस्था सम्मेलन 2018 का आयोजन

केन्या की राजधानी नैरोबी में पहले सतत नीली अर्थव्यवस्था सम्मेलन 2018 का आयोजन 26 से 28 नवम्बर के दौरान किया गया। इसकी थीम “नीली अर्थव्यवस्था तथा  सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा” थी। इस सम्मेलन का आयोजन केन्या द्वारा किया गया, कनाडा और जापान इस सम्मेलन का सह-आयोजक थे।

मुख्य बिंदु

इस सम्मेलन में विश्व भर से लगभग 4000 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। भारत की ओर से इस सम्मेलन में केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने हिस्सा लिया। हिन्द महासागर में भारत की स्थिति सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। इस सम्मेलन में विश्व वन्यजीव फण्ड, अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन, अंतर्राष्ट्रीय सीबेड प्राधिकरण, विश्व बैंक तथा ओशन फाउंडेशन इत्यादि ने भी हिस्सा लिया।

नीली अर्थव्यस्था से अभिप्राय समुद्री संसाधनों का उपयोग विकास, रोज़गार तथा जीवन स्तर को बेहतर करने लिए करना है। इसमें समुद्री परिवहन, मतस्य पालन, नवीकरणीय उर्जा, कचरा प्रबंधन तथा पर्यटन शामिल है।

भारत के लिए नीली अर्थव्यवस्था का महत्त्व काफी अधिक है। भारत समुद्री अधोसंरचना, अंतर्देशीय जलमार्गों तथा तटीय शिपिंग इत्यादि का विकास कर रहा है। इसके लिए भारत ने “सागरमाला कार्यक्रम लांच किया है। इसका उद्देश्य समुद्री लोजिस्टिक्स तथा बंदरगाहों का विकास करना है। इसके लिए भारत का राष्ट्रीय दृष्टिकोण “SAGAR – Security and Growth for All in IOR” शब्द के द्वारा व्यक्त किया जा सकता है।

 

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