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दूसरे देशों के उपग्रहों को लांच करके इसरो ने पिछले पांच वर्षों में कमाए 1,245 करोड़ रुपये

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) ने पिछले पांच वर्षों में दूसरे देशों के उपग्रहों को लांच करके कमाए 1,245 करोड़ रुपये हैं। पिछले पांच वर्षों में इसरो ने 26 अलग-अलग देशों के उपग्रह लांच किये हैं। वित्त वर्ष 2018-19 में इसरो ने अब अक विदेशी उपग्रहों को लांच करके 324.19 करोड़ रुपये की कमाई की है, इसमें पिछले वर्ष के मुकाबले 40% की वृद्धि हुई है। 2017-18 में इसरो ने विदेशी उपग्रहों को लांच करके 232.56 करोड़ रुपये कमाए थे। 2018-19 के दौरान इसरो ने  भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में 91.63 करोड़ रुपये की विवृद्धि की है।

1999 से लेकर अब तक इसरो ने कुल 319 विदेशी उपग्रह लांच किये हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन

इसकी स्‍थापना 1969 में की गई। 1972 में भारत सरकार द्वारा ‘अंतरिक्ष आयोग’ और ‘अंतरिक्ष विभाग’ के गठन से अंतरिक्ष शोध गतिविधियों को अतिरिक्‍त गति प्राप्‍त हुई। ‘इसरो’ को अंतरिक्ष विभाग के नियंत्रण में रखा गया। 70 का दशक भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में प्रयोगात्‍मक युग था जिस दौरान ‘भास्‍कर’, ‘रोहिणी”आर्यभट’, तथा ‘एप्पल’ जैसे प्रयोगात्‍मक उपग्रह कार्यक्रम चलाए गए।

80 का दशक संचालनात्‍मक युग बना जबकि ‘इन्सेट’ तथा ‘आईआरएस’ जैसे उपग्रह कार्यक्रम शुरू हुए। आज इन्सेट तथा आईआरएस इसरो के प्रमुख कार्यक्रम हैं। अंतरिक्ष यान के स्‍वदेश में ही प्रक्षेपण के लिए भारत का मज़बूत प्रक्षेपण यान कार्यक्रम है। इसरो की व्‍यावसायिक शाखा एंट्रिक्‍स, विश्‍व भर में भारतीय अंतरिक्ष सेवाओं का विपणन करती है। भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम की ख़ास विशेषता अंतरिक्ष में जाने वाले अन्‍य देशों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विकासशील देशों के साथ प्रभावी सहयोग है।

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कार्टोसैट-3 क्या है?

भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन 27 नवम्बर, 2019 को कार्टोसेट-3 नामक इमेजिंग व मैपिंग उपग्रह को लांच करेगा। इसके साथ 13 वाणिज्यिक उपग्रह भी लांच किये जायेंगे।

कार्टोसैट-3

यह तीसरी पीढ़ी का पृथ्वी पर्यवेक्षण उपग्रह है, इसका निर्माण इसरो द्वारा किया गया है। यह इसरो द्वारा निर्मित सबसे एडवांस्ड इमेजिंग सैटेलाइट्स में से एक है। यह उपग्रह पृथ्वी के हाई रेजोल्यूशन चित्र लेने में सक्षम है। अब तक कुल 8 कार्टोसेट उपग्रह लांच किये जा चुके हैं।

कार्टोसैट का उपयोग शहरी नियोजन, कृषि, जल संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण विकास, पर्यावरण, वानिकी, महासागरीय संसाधन तथा आपदा प्रबंधन के लिए किया जायेगा।

कार्टोसैट-3 तथा अन्य वाणिज्यिक उपग्रहों को श्रीहरिकोटा से PSLV-C47 के द्वारा लांच किया जायेगा। यह 13 वाणिज्यिक उपग्रह लक्सेम्बर्ग बेस्ड स्पेस कंपनी क्लेओस के हैं। यह उपग्रह कंपनी के स्काउटिंग मिशन के उपग्रहों के समूह का हिस्सा हैं। स्काउटिंग मिशन के डाटा का उपयोग समुद्री गतिविधि, निगरानी तथा इंटेलिजेंस से सम्बंधित कार्य के लिए किया जायेगा।

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