mahatma gandhi

आज मनाई जा रही है महात्मा गाँधी की 150वीं वर्षगाँठ

भारत में 2 अक्टूबर को गाँधी जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष महात्मा गाँधी की 150वीं जन्म वर्षगाँठ है। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी तथा अन्य गणमान्य नेताओं ने राजघाट में गांधीजी को श्रद्धांजली अर्पित की।

मोहनदास करमचंद गाँधी

मोहनदास करमचंद गाँधी को महात्मा गांधी के नाम से जाना जाता है, उन्होंने भारत की स्वतंत्रता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उनका जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को ब्रिटिश भारत की बॉम्बे प्रेसीडेंसी के पोरबंदर में हुआ था। उनकी हत्या 30 जनवरी, 1948 को नाथूराम गोडसे द्वारा की गयी थी।

स्वतंत्रता आन्दोलन में उनके निस्वार्थ योगदान के लिए गांधीजी को “बापू” भी कहा जाता है। उन्हें अनाधिकारिक रूप से “राष्ट्रपिता” भी कहा जाता है। उन्होंने लन्दन में कानून की पढाई की थी, तत्पश्चात वे भारत लौटे, बाद में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका में एक भारतीय फर्म में कार्य किया।

गांधीजी 1915 में दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे और वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए। भारत में उन्होंने कई सामाजिक कार्यों तथा स्वराज प्राप्त करने के लिए कार्य किया। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध के द्वारा ब्रिटिश शासन के विरुद्ध आवाज़ उठाई। उन्होंने स्वतंत्रता के लिए सत्याग्रह तथा असहयोग आन्दोलन का उपयोग किया। ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध गांधीजी के विरोध में असहयोग आन्दोलन और दांडी यात्रा प्रमुख है, इससे ब्रिटिश सरकार को काफी धक्का लगा।

गांधीजी ने अपने जीवन को सरलता और सदाचार से जीया और वे पारंपरिक भारतीय परिधान धोती और शाल ही पहनते थे। राजनीतिक विरोध प्रकट करने तथा स्वयं के शुद्धिकरण लिए वे अनशन करते थे। उन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

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2 अक्टूबर : अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस

अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को मनाया जाता है, इसे महात्मा गाँधी की जन्म वर्षगाँठ के अवसर पर मनाया जाता है। महात्मा गाँधी अहिंसा में प्रबल विश्वास रखते थे। अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाने का उद्देश्य सभी देशों में शिक्षा व जन-जाग्रति के द्वारा अहिंसा के सिद्धांत पर बल देना है।

अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस

इस दिवस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा ने A/RES/61/271 प्रस्ताव को पारित करके की थी, इस प्रस्ताव को जून, 2007 में पारित किया गया था। इस प्रस्ताव के द्वारा अहिंसा के सिद्धांत की सार्वभौमिक प्रासंगिकता तथा शांति व सहिष्णुता की संस्कृति को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता प्रकट की गयी थी। इस दिवस के द्वारा अहिंसा के सन्देश का प्रचार किया जाता है।

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