mahatma gandhi

2 अक्टूबर : अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस

अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस प्रतिवर्ष 2 अक्टूबर को मनाया जाता है, इसे महात्मा गाँधी की जन्म वर्षगाँठ के अवसर पर मनाया जाता है। महात्मा गाँधी अहिंसा में प्रबल विश्वास रखते थे। अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस मनाने का उद्देश्य सभी देशों में शिक्षा व जन-जाग्रति के द्वारा अहिंसा के सिद्धांत पर बल देना है।

अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस

इस दिवस की स्थापना संयुक्त राष्ट्र महासभा ने A/RES/61/271 प्रस्ताव को पारित करके की थी, इस प्रस्ताव को जून, 2007 में पारित किया गया था। इस प्रस्ताव के द्वारा अहिंसा के सिद्धांत की सार्वभौमिक प्रासंगिकता तथा शांति व सहिष्णुता की संस्कृति को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता प्रकट की गयी थी। इस दिवस के द्वारा अहिंसा के सन्देश का प्रचार किया जाता है।

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“द डायरी ऑफ़ मनु गाँधी” पुस्तक को नई दिल्ली में लांच किया गया

केन्द्रीय मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने नई दिल्ली में “द डायरी ऑफ़ मनु गाँधी” (1943-44) पुस्तक को लांच किया। इस पुस्तक को भारतीय राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा ऑक्सफ़ोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस के साथ मिलकर लांच किया गया है।

मनु गाँधी (मृदुला) महात्मा गाँधी के भतीजे जयसुखलाल अमृतलाल गाँधी की पुत्री थीं, वे 30 जनवरी, 1948 तक गांधीजी के साथ रहीं। वे गांधीजी की कस्तूरबा गाँधी की सहयोगी भी थीं।

द डायरी ऑफ़ मनु गाँधी

इस पुस्तक को वास्तविक रूप में गुजराती में लिखा गया था। इस पुस्तक का अनुवाद त्रिदिप सुहृद द्वारा किया गया है। इस डायरी के पहले खंड में 1943-44 के कालखंड को कवर किया गया है। इसमें मनु गाँधी तथा महात्मा गाँधी के जीवन का वर्णन है।

राष्ट्रीय अभिलेखागार

भारतीय अभिलेखागार की स्थापना में सैंडमैन की रिपोर्ट काफी महत्वपूर्ण थी, वे सिविल ऑडिटर थे, उन्होंने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को “ग्रैंड सेंट्रल आर्काइव” में स्थानांतरित करने के महत्त्व पर बल दिया था। 1889 में एलफिंस्टोन कॉलेज, बॉम्बे के प्रोफेसर से जी. डब्ल्यू. फारेस्ट को भारत सरकार के विदेश विभाग के रिकॉर्ड की छान-बीन करने का कार्य सौंपा गया था। उन्होंने ईस्ट इंडिया कंपनी के प्रशासन के सभी रिकार्ड्स को केन्द्रीय भंडार में स्थानांतरित करने की अनुशंसा की थी। इसके पश्चात् 11 मार्च, 1891 को कलकत्ता में इम्पीरियल सेक्रेटेरिएट भवन में इम्पीरियल रिकार्ड्स डिपार्टमेंट (IRD) की स्थापना की गयी थी।

1911 में इम्पीरियल रिकार्ड्स डिपार्टमेंट को दिल्ली स्थानांतरित किया गया। स्वतंत्रता के बाद भारत सरकार ने इसका नाम बदलकर राष्ट्रीय अभिलेखागार कर दिया। वर्तमान में राष्ट्रीय अभिलेखागार को संस्कृति मंत्रालय से जोड़ा गया है। इसके क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल में स्थित है, इसके तीन रिकॉर्ड केंद्र जयपुर, पुदुचेरी तथा भुबनेश्वर में स्थित है।

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