#MeToo

कार्यस्थल पर यौन शोषण पर रोकथाम के लिए मंत्री समूह का पुनर्गठन किया गया 

भारत सरकार ने कार्यस्थल पर यौन शोषण पर रोकथाम लगाने के लिए मंत्री समूह का पुनर्गठन किया है, इस मंत्री समूह के अध्यक्ष केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह हैं। यह मंत्री समूह कार्यस्थल पर यौन शोषण पर रोकथाम लगाने तथा कानूनी फ्रेमवर्क को मज़बूत बनाने के लिए कार्य करेगा। इस पुनर्गठित मंत्री समूह के नया सदस्य हैं : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, महिला व बाल विकास मंत्री स्मृति इरानी।

इससे पहले अक्टूबर, 2018 में कार्यस्थल पर यौन शोषण को रोकने तथा कानूनी फ्रेमवर्क को मज़बूत बनाने के लिए मंत्री समूह का गठन किया गया था। उस मंत्री समूह का गठन केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में किया गया था। इसका मुख्य कारण  #MeToo के तहत सामने आये यौन शोषण के मामले हैं।

#MeToo आन्दोलन क्या है?

दरअसल #MeToo आन्दोलन के तहत महिलाएं कार्यस्थल इत्यादि पर उनके साथ हुए अभद्र व्यवहार अथवा शारीरिक शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठा रही हैं। इसकी शुरुआत अक्टूबर, 2017 में हुई थी, जब यह हैशटैग (#MeToo) इन्टरनेट पर काफी वायरल हुआ था। अमेरिकी अभिनेत्री एलिसा मिलानों ने 2017 में ट्विटर पर महिलाओं को अपने साथ हुए अभद्र व्यवहार अथवा शारीरिक शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित किया, उसके बाद इस हैशटैग का उपयोग इन्टरनेट पर बड़े पैमाने पर शुरू हुआ और महिलाओं ने अपने साथ हुई इन दुर्व्यवहार की घटनाओं को साझा करना शुरू हुआ। इसके तहत कई बड़े नेताओं, अभिनेताओं तथा फिल्म निर्देशकों द्वारा किये शारीरिक शोषण के विरुद्ध महिलाएं अपने आवाज़ उठा रही हैं। हाल ही में भारत में भी यह आन्दोलन काफी तीव्रता पकड़ रहा है और अब तक कई बड़े अभिनेताओं, नेताओं तथा फिल्म निर्देशकों द्वारा किये गये शारीरिक शोषण के विरुद्ध महिलाएं आवाज़ उठा रहीं हैं।

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कार्यस्थल पर यौन शोषण के मामलों के निपटारे के लिए मंत्री समूह का गठन किया गया

केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने हाल ही में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन शोषण के मामलों का निपटारा करने के  लिए मंत्रीसमूह का गठन किया। इस मंत्री समूह का गठन केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में किया गया है। इस मंत्री समूह के अन्य सदस्य सड़क नितिन गडकरी (सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, जल संसाधन, नदी विकास एवं गंगा संरक्षण तथा जहाजरानी मंत्री), निर्मला सीताराम (रक्षा मंत्री) तथा मेनका गाँधी (महिला एवं बाल विकास मंत्री) हैं। इसका मुख्य कारण हाल ही में #MeToo के तहत सामने आये यौन शोषण के मामले हैं।

क्या है #MeToo आन्दोलन?

दरअसल #MeToo आन्दोलन के तहत महिलाएं कार्यस्थल इत्यादि पर उनके साथ हुए अभद्र व्यवहार अथवा शारीरिक शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठा रही हैं। इसकी शुरुआत अक्टूबर, 2017 में हुई थी, जब यह हैशटैग (#MeToo) इन्टरनेट पर काफी वायरल हुआ था। अमेरिकी अभिनेत्री एलिसा मिलानों ने 2017 में ट्विटर पर महिलाओं को अपने साथ हुए अभद्र व्यवहार अथवा शारीरिक शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाने के लिए प्रेरित किया, उसके बाद इस हैशटैग का उपयोग इन्टरनेट पर बड़े पैमाने पर शुरू हुआ और महिलाओं ने अपने साथ हुई इन दुर्व्यवहार की घटनाओं को साझा करना शुरू हुआ। इसके तहत कई बड़े नेताओं, अभिनेताओं तथा फिल्म निर्देशकों द्वारा किये शारीरिक शोषण के विरुद्ध महिलाएं अपने आवाज़ उठा रही हैं। हाल ही में भारत में भी यह आन्दोलन काफी तीव्रता पकड़ रहा है और अब तक कई बड़े अभिनेताओं, नेताओं तथा फिल्म निर्देशकों द्वारा किये गये शारीरिक शोषण के विरुद्ध महिलाएं आवाज़ उठा रहीं हैं।

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