Nirbhaya Fund

“सेफ सिटी प्रोग्राम” की समीक्षा

हालिया मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक “सेफ सिटी” कार्यक्रम लांच करने के एक वर्ष बाद भी महिला सुरक्षा की स्थिति में अधिक सुधार नही आया है। इसमें फण्ड के अनुचित उपयोग को भी रेखांकित किया गया है।

सेफ सिटी प्रोग्राम

  • इस कार्यक्रम को सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की सुरक्षा को मज़बूत बनाने के लिए लांच किया गया था।
  • इस कार्यक्रम का क्रियान्वयन केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा केन्द्रीय महिला व बाल विकास मंत्रालय, केन्द्रीय आवास व शहरी मामले मंत्रालय, सूचना व प्रौद्योगिकी मंत्रालय तथा शहरों के पुलिस आयुक्तों के साथ मिलकर किया जा रहा है।
  • शुरू में इस कार्यक्रम को 8 शहरों : मुंबई, दिल्ली, कलकता, लखनऊ, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद तथा अहमदाबाद में लांच किया गया था। सर्वप्रथम इस कार्यक्रम को लखनऊ ने नवम्बर, 2018 में क्लियर किया था।
  • इस योजना के लिए निर्भया फण्ड स्कीम के तहत 194.44 करोड़ रुपये मंज़ूर किये गये थे। यह केंद्र द्वारा प्रायोजित योजना है, इसमें केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी 60:40 के अनुपात में है।
  • इस योजना में अपराध हॉटस्पॉट को चिन्हित किया जाता है, इसमें CCTV कवरेज, ड्रोन आधारित निगरानी, ऑटोमेटेड नंबर प्लेट रीडिंग का उपयोग शामिल है।

निर्भया फण्ड

इस फण्ड की स्थापना वित्त मंत्रालय ने 2013 में 1000 करोड़ रुपये के कार्पस से की थी। यह फण्ड देश में महिलाओं की सुरक्षा के उपाय में वृद्धि करने के लिए स्थापित किया गया था। इस फण्ड की मॉनिटरिंग महिला व बाल कल्याण मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में निर्भय फण्ड की सशक्त समिति द्वारा की जाती है। विभिन्न मंत्रालयों द्वारा निर्भया फण्ड के उपयोग के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाते हैं।

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केंद्र सरकार ने निर्भया फण्ड के तहत तीन प्रस्तावों को मंज़ूरी दे दी

केंद्र सरकार ने हाल ही में निर्भया फण्ड के तहत 1023 फ़ास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की स्थापना को मंज़ूरी समेत तीन प्रस्तावों को मंज़ूरी दी। यह निर्णय महिला व बाल कल्याण मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में निर्भय फण्ड की सशक्त समिति द्वारा लिया गया।

मुख्य बिंदु

1023 फ़ास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय : इस प्रस्ताव को विधि मंत्रालय के अंतर्गत न्याय विभाग द्वारा प्रस्तुत किया गया, इसका उद्देश्य बलात्कार तथा पोक्सो अधिनियम के तहत लंबित पड़े मामलों का शीघ्र निपटारा करना है। पहला चरण में 777 फ़ास्ट ट्रैक विशेष न्यायालयों की स्थापना 9 राज्यों में की जाएगी। दूसरे चरण में 246 फ़ास्ट ट्रैक न्यायालयों की स्थापना की जाएगी। इसके लिए 767.25 करोड़ रुपये की राशि निश्चित की गयी है।

यौन शोषण के मामलों की जांच के लिए फॉरेंसिक किट : इस प्रस्ताव को केन्द्रीय गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तुत किया गया। इन किट्स से राज्य फॉरेंसिक विज्ञान लेबोरेटरी की क्षमता में वृद्धि होगी।

50 रेलवे स्टेशनों में निगरानी के लिए विडियो निगरानी सिस्टम की स्थापना : इस प्रस्ताव को कोंकण रेलवे कारपोरेशन लिमिटेड द्वारा प्रस्तुत किया गया।

निर्भया फण्ड

इस फण्ड की स्थापना वित्त मंत्रालय ने 2013 में 1000 करोड़ रुपये के कार्पस से की थी। यह फण्ड देश में महिलाओं की सुरक्षा के उपाय में वृद्धि करने के लिए स्थापित किया गया था। इस फण्ड की मॉनिटरिंग महिला व बाल कल्याण मंत्रालय के सचिव की अध्यक्षता में निर्भय फण्ड की सशक्त समिति द्वारा की जाती है। विभिन्न मंत्रालयों द्वारा निर्भया फण्ड के उपयोग के लिए प्रस्ताव प्रस्तुत किये जाते हैं।

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