NSIL

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मंजूरी दी

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में, अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की क्षमताओं को आगे बढ़ाने के लिए, मंत्रिमंडल ने विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र की भागीदारी को मंजूरी दी।

भारत सरकार का यह लंबे समय से प्रतीक्षित कदम वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण खिलाड़ियों में से एक के रूप में भारत की स्थिति स्थापित करने के लिए अत्यधिक महत्वपूर्ण है।  यह निर्णय पूरे अंतरिक्ष क्षेत्र में नई ऊर्जा और आयाम लाएगा, जो लंबे समय में अंतरिक्ष क्षेत्र को आत्मनिर्भर और तकनीकी रूप से उन्नत बनाकर एक आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में भी मदद करेगा।

IN-SPACe और NSIL की भूमिका

  • मंत्रिमंडल ने भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) की स्थापना को मंजूरी दे दी है। अनुकूल नियामक और उत्साहजनक नीतियों के माध्यम से, IN-SPACe के पास विभिन्न अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र का मार्गदर्शन करने की जिम्मेदारी होगी।
  • सरकारी स्वामित्व वाली उद्यम न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (एनएसआईएल) की स्थापना मार्च 2019 में हुई थी। एनएसआईएल के पास अंतरिक्ष गतिविधियों में निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए आर्थिक और सामाजिक नीतियों को बदलने की जिम्मेदारी होगी।

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जी. नारायणन को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड का चेयरमैन नियुक्त किया गया

जाने-माने अंतिरक्ष वैज्ञानिक जी. नारायणन को ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ का चेयरमैन नियुक्त किया गया है। ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ इसरो की वाणिज्यिक इकाई है। इससे पहले जी. नारायणन तिरुवनंतपुरम में इसरो की एक इकाई LPSC (Liquid Propulsion Systems Centre) में डिप्टी डायरेक्टर के रूप में कार्यरत थे। ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ एक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई है, इसका गठन इसरो के अधीन किया गया है, इसके द्वारा स्पेस मार्केट में वाणिज्यिक अवसरों का उपयोग किया जाएगा। ‘न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड’ छोटे उपग्रहों को लांच करने के लिए SSLV (Small Satellite Launch Vehicle) का निर्माण करेगा।

न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड

23 मई, 2019 को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) का उद्घाटन बंगलुरु में किया गया, यह भारतीय अन्तरिक्ष अनुसन्धान संगठन (इसरो) की वाणिज्यिक शाखा है। यह अन्तरिक्ष टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में निजी उद्यम को बढ़ावा देगी। यह तकनीक हस्तांतरण मैकेनिज्म के द्वारा स्माल सैटेलाइट लांच व्हीकल (SSLV) तथा PSLV के विकास व उत्पादन का कार्य करेगी। यह वैश्विक वाणिज्यिक SSLV मार्केट की मांग को पूरा करने महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

6 मार्च, 2019 को अन्तरिक्ष विभाग ने इसरो ने अपनी दूसरी इकाई NSIL का पंजीकरण किया था। अन्तरिक्ष विभाग का पहला वाणिज्यिक वेंचर एंट्रिक्स कारपोरेशन लिमिटेड था, इसकी स्थापना सितम्बर, 1992 में की गयी थी। NSIL के द्वारा इसरो के अनुसन्धान व विकास कार्य का वाणिज्यीकरण किया जाएगा। NSIL को 100 करोड़ रुपये की शेयर कैपिटल प्रदान की गयी है, इसे 10 करोड़ रुपये की पेड-अप कैपिटल प्रदान की गयी है।

 

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