PM 2.5

कानपूर है विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित शहर : गिनीज़ वर्ल्ड रिकार्ड्स 2020

गिनीज़ वर्ल्ड रिकार्ड्स के नवीनतम संस्करण के अनुसार उत्तर प्रदेश का कानपूर शहर विश्व का सबसे अधिक प्रदूषित शहर है। इसका प्रकाशन प्रतिवर्ष पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा किया जाता है। इस वर्ष इस पुस्तक में भारतीयों द्वारा 80 रिकॉर्ड बनाये गये हैं।

कानपूर : विश्व का सर्वाधिक प्रदूषित शहर

विश्व स्वास्थ्य संगठन के विश्लेषण के मुताबिक कानपूर विश्व का सबसे प्रदूषित शहर है, 2016 में यहाँ पर PM 2.5 का स्तर 173 माइक्रोग्राम/घन मीटर है। PM 2.5 का यह स्तर विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित अधिकतम स्तर 10 माइक्रोग्राम/घन मीटर से 17 गुणा अधिक है।

PM 2.5

पार्टिकुलेट मैटर (पीएम) में जीवाश्म ईंधनों का सर्वाधिक योगदान होता है वायु प्रदूषण का मुख्य कारण जीवाश्म ईंधनों का अनियंत्रित दहन है। डीज़ल से चलने वाले सार्वजनिक परिवहन, वाहन तथा शक्ति संयंत्र वायु प्रदूषण के एक अन्य प्रमुख कारण होते हैं। पार्टिकुलेट मैटर कण का व्यास 2.5 माइक्रोमीटर से कम होता है। पार्टिकुलेट मैटर काफी महीन कण होते हैं, ज्यादा समय तक इसके प्रभाव में रहने से कैंसर, ह्रदय तथा फेफड़ों के रोग हो सकते हैं।

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स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर-2019 रिपोर्ट

हाल ही में अमेरिकी संस्थानों हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टिट्यूट (HEI) तथा इंस्टिट्यूट फॉर हेल्थ मैट्रिक्स एंड इवैल्यूएशन (IMHE) ने हाल ही में वैश्विक वायु गुणवत्ता पर स्टेट ऑफ़ ग्लोबल एयर-2019 नामक रिपोर्ट जारी की। इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में वायु प्रदूषण से होने वाली 5 मिलियन मौतों में से आधी मौतें चीन और भारत में होती हैं। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि PM 2.5 टाइप 2 मधुमेह का तीसरा सबसे बड़ा कारक है।

मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार विकसित देशों के मुकाबले विकासशील देशों में PM 2.5 का स्तर चार से पांच गुणा अधिक है।
  • 2017 में दक्षिण एशिया में PM 2.5 सर्वाधिक था। इस क्षेत्र में भूटान में PM 2.5 का स्तर सबसे कम है।
  • जिन 10 देशों में PM 2.5 सबसे कम है : मालदीव, अमेरिका, नॉर्वे, एस्टोनिया, आइसलैंड, कनाडा, स्वीडन, न्यूजीलैंड, ब्रूनेई तथा फ़िनलैंड।
  • विश्व में औसतन वायु प्रदूषण से सामूहिक जीवन आकांक्षा में 1 वर्ष तथा 8 महीने की कमी आई है।

भारत के सन्दर्भ में मुख्य बिंदु

  • इस रिपोर्ट के अनुसार भारत में PM 2.5 के मुख्य स्त्रोत इस प्रकार हैं : घरों में इंधन के ज्वलन से निकलने वाला धुआं, निर्माण, सड़क तथा अन्य कार्यों से उत्पन्न होने वाले धुलकण, कोयले से चलने वाले पॉवर प्लांट तथा उद्योग, ईंट उत्पादन, परिवहन, डीजल से चलने वाले उपकरण इत्यादि।
  • 2017 में भारत में 846 मिलियन लोग (60% जनसँख्या) घरेलु वायु प्रदूषण से प्रभावित हुई, चीन में यह आंकड़ा 452 मिलियन (32% जनसँख्या) रहा।

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