Ranjan Gogoi

कल सेवानिवृत्त होंगे मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई

मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई 17 नवम्बर, 2019 को सेवानिवृत्त हो जायेंगे। उन्होंने 3 अक्टूबर, 2018 को भारत के 46वें मुख्य न्यायाधीश की शपथ ली थी। उन्होंने जस्टिस दीपक मिश्रा का स्थान लिया था। उन्होंने 3 अक्टूबर, 2018 से 17 नवम्बर, 2019 तक भारत के मुख्य न्यायधीश के रूप में कार्य किया। उनका कार्यकाल लगभग 13 महीने का रहा। जस्टिस रंजन गोगोई उत्तर-पूर्वी क्षेत्र से देश के मुख्य न्यायधीश बनने वाले पहले व्यक्ति हैं। उनके बाद शरद अरविन्द बोबड़े भारत के अगले मुख्य न्यायधीश होंगे।

जस्टिस रंजन गोगोई

जस्टिस रंजन गोगोई का जन्म 18 नवम्बर, 1954 को हुआ था, वे असम के निवासी हैं। वे असम के पूर्व मुख्यमंत्री केशब चन्द्र गोगोई के पुत्र हैं। उन्होंने आरम्भ में गुवाहाटी उच्च न्यायालय में कार्य किया। फरवरी, 2001 में उन्हें उच्च न्यायालय में स्थायी न्यायधीश के रूप में नियुक्त किया गया। सितम्बर, 2010 में उनका स्थानांतरण पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में किया गया जहाँ फरवरी, 2011 में उन्हें मुख्य न्यायधीश नियुक्त किया गया। अप्रैल, 2012 में उनकी नियुक्ति देश के सर्वोच्च न्यायालय में हुई थी।

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लोकसभा ने पारित किया सर्वोच्च न्यायालय (न्यायधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2019

लोकसभा ने हाल ही पारित किया सर्वोच्च न्यायालय (न्यायधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2019 पारित किया। इस बिल के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 (मुख्य न्यायधीश के अतिरिक्त) किया जायेगा। इस बिल के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय (न्यायधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

भारत के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या में वृद्धि करने की मांग की थी। अपने पत्र में मुख्य न्यायधीश ने कहा था कि न्यायालय के कुशल संचालन तथा शीघ्र न्याय प्रदान करने के लिए न्यायधीशो की संख्या में बढ़ोत्तरी करना ज़रूरी है।

कानून मंत्री द्वारा राज्य सभा में दिए गये लिखित जवाब के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में 11,59,331 मामले लंबित पड़े हुए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय की संरचना

सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या को संविधान के अनुच्छेद 124(1) के द्वारा निश्चित किया गया है। इस संख्या में संसदीय विधेयक के द्वारा वृद्धि की जा सकती है। इसके लिए संसद ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 लागू किया था। शुरू में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या 10 (मुख्य न्यायधीश के अतिरिक्त) थी। इस अधिनियम अंतिम बार 2009 में संशोधन किया गया था, 2009 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीशों की संख्या को 25 से बढ़ाकर 30 (मुख्य न्यायधीश के अतिरिक्त) कर दिया गया था।

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