Ranjan Gogoi

लोकसभा ने पारित किया सर्वोच्च न्यायालय (न्यायधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2019

लोकसभा ने हाल ही पारित किया सर्वोच्च न्यायालय (न्यायधीशों की संख्या) संशोधन बिल, 2019 पारित किया। इस बिल के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या को 30 से बढ़ाकर 33 (मुख्य न्यायधीश के अतिरिक्त) किया जायेगा। इस बिल के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय (न्यायधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन किया जायेगा।

पृष्ठभूमि

भारत के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या में वृद्धि करने की मांग की थी। अपने पत्र में मुख्य न्यायधीश ने कहा था कि न्यायालय के कुशल संचालन तथा शीघ्र न्याय प्रदान करने के लिए न्यायधीशो की संख्या में बढ़ोत्तरी करना ज़रूरी है।

कानून मंत्री द्वारा राज्य सभा में दिए गये लिखित जवाब के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में 11,59,331 मामले लंबित पड़े हुए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय की संरचना

सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या को संविधान के अनुच्छेद 124(1) के द्वारा निश्चित किया गया है। इस संख्या में संसदीय विधेयक के द्वारा वृद्धि की जा सकती है। इसके लिए संसद ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 लागू किया था। शुरू में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या 10 (मुख्य न्यायधीश के अतिरिक्त) थी। इस अधिनियम अंतिम बार 2009 में संशोधन किया गया था, 2009 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीशों की संख्या को 25 से बढ़ाकर 30 (मुख्य न्यायधीश के अतिरिक्त) कर दिया गया था।

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कैबिनेट ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या को बढाने के लिए मंज़ूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या में वृद्धि करने के लिए मंज़ूरी दे दी है। मौजूदा समय में सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायधीश समेत 31 न्यायधीश हैं, अब यह संख्या बढ़कर 34 हो जाएगी। इसके लिए सर्वोच्च न्यायालय (न्यायधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 में संशोधन के लिए विधेयक को मंज़ूरी दी गयी है।

पृष्ठभूमि

भारत के मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या में वृद्धि करने की मांग की थी। अपने पत्र में मुख्य न्यायधीश ने कहा था कि न्यायालय के कुशल संचालन तथा शीघ्र न्याय प्रदान करने के लिए न्यायधीशो की संख्या में बढ़ोत्तरी करना ज़रूरी है।

कानून मंत्री द्वारा राज्य सभा में दिए गये लिखित जवाब के अनुसार सर्वोच्च न्यायालय में 11,59,331 मामले लंबित पड़े हुए हैं।

सर्वोच्च न्यायालय की संरचना

सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या को संविधान के अनुच्छेद 124(1) के द्वारा निश्चित किया गया है। इस संख्या में संसदीय विधेयक के द्वारा वृद्धि की जा सकती है। इसके लिए संसद ने सर्वोच्च न्यायालय (न्यायधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956 लागू किया था। शुरू में सर्वोच्च न्यायालय में न्यायधीशों की संख्या 10 (मुख्य न्यायधीश के अतिरिक्त) थी। इस अधिनियम अंतिम बार 2009 में संशोधन किया गया था, 2009 में सर्वोच्च न्यायालय के न्यायधीशों की संख्या को 25 से बढ़ाकर 30 (मुख्य न्यायधीश के अतिरिक्त) कर दिया गया था।

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