RBI

माइकल पात्रा को भारतीय रिज़र्व बैंक का चौथा डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया गया

केंद्र सरकार ने भारतीय रिज़र्व बैंक के कार्यकारी निदेशक माइकल पात्रा को आरबीआई का चौथा डिप्टी गवर्नर नियुक्त किया है। उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा। आरबीआई के तीन अन्य डिप्टी गवर्नर हैं – एन.एस. विश्वनाथन, बी.पी. कानूनगो और एम.के. जैन। पूर्व डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने जुलाई 2019 में अपने पद से इस्तीफ़ा दिया था।

भारतीय रिज़र्व बैंक

भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल 1935 को भारतीय रिज़र्व बैंक की स्थापना हुई थी। शुरू में रिज़र्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय कोलकाता में स्थापित किया गया था लेकिन 1937 में स्थायी रूप से इसे मुंबई में हस्तांतरित कर दिया गया था। केंद्रीय कार्यालय वह स्थान है, जहां गवर्नर बैठता है तथा जहां नीतियां तैयार की जाती हैं। 1949 मे राष्ट्रीयकरण के बाद से रिज़र्व बैंक पूरी तरह से भारत सरकार के स्वामित्व में है।

भारतीय रिज़र्व बैंक के प्राथमिक कार्य

  • विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम, 1999 को प्रबंधित करना
  • मौद्रिक नीति तैयार करना, कार्यान्वयन और निगरानी करना
  • बैंकिंग संचालन के मापदंडों को निर्धारित करना
  • केन्द्रीय और राज्य सरकार के लिए मर्चेंट बैंकिंग फ़ंक्शन

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , ,

आज से NEFT की सुविधा 24*7 उपलब्ध होगी

आज (16 दिसम्बर) से NEFT (National Electronic Funds Transfer) की सुविधा 24*7 उपलब्ध होगी, इससे पहले NEFT की सुविधा केवल बैंक के काम करने के घंटे के दौरान ही उपलब्ध होती थी। इससे पहले NEFT के द्वारा किये जाने वाले लेनदेन पर लगने वाले शुल्क को भी ख़त्म किया गया था, यह देश में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए आवश्यक है।

NEFT क्या है?

NEFT  का पूर्ण स्वरुप National Electronic Funds Transfer है। यह एक इलेक्ट्रॉनिक फण्ड ट्रान्सफर सिस्टम है, इसे नवम्बर, 2005 में शुरू किया गया था। NEFT के द्वारा बैंक ग्राहक किसी दूसरे बैंक खाते में पैसे भेज सकते हैं। NEFT धन हस्तांतरण का समायोजन हर आधे घंटे बाद करता है। 11 जून को भारतीय रिज़र्व बैंक ने NEFT लेनदेन पर लगाए जाने वाले शुल्क को हटाने की घोषणा की थी, यह निर्णय 1 जुलाई, 2019 से लागू हो गया है। इससे पहले NEFT से किये जाने वाले लेनदेन पर मामूली शुल्क लिया जाता था, 10,000 रुपये तक के लेनदेन पर 2.50 रुपये शुल्क लगता था, जबकि 10,000 से एक लाख रुपये तक के लेनदेन पर 5 रुपये का शुल्क लगता था।

आप इन अपडेट्स को करेंट अफेयर्स टूड़े मोबाइल एप्प में भी पढ़ सकते हैं।

Categories:

Month:

Tags: , , , , ,

Advertisement