SAAB

उड़ान योजना के तहत साब तथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने समझौते पर हस्ताक्षर किये

उड़ान योजना के तहत स्वीडिश एयरोस्पेस तथा रक्षा कंपनी साब (Saab) तथा भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने समझौते पर हस्ताक्षर किये। इस समझौते का उद्देश्य क्षेत्रीय कनेक्टिविटी स्कीम उड़ान के तहत हवाईअड्डों के ट्रैफिक प्रबंधन के लिए समाधान ढूंढना है।

हवाई ट्रैफिक प्रबंधन में विमान का प्रस्थान, उड़ान, लैंडिंग, एयर ट्रैफिक सर्विस (ATS), एयरस्पेस मैनेजमेंट (ASM), एयर ट्रैफिक फ्लो तथा क्षमता प्रबंधन (ATFCM) इत्यादि गतिविधियाँ शामिल होती हैं।

साब के पास एडवांस्ड सरफेस मूवमेंट गाइडेंस एंड कण्ट्रोल सिस्टम (A-SMGCS) तथा सरफेस मूवमेंट राडार (SR-3) तथा रिमोट टावर्स इत्यादि उपलब्ध हैं, भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण इनका उपयोग भारत के विभिन्न हवाईअड्डों में कर सकता है।

इस समझौते के तहत साब उड़ान योजना के तहत भारत में हवाईअड्डों के लिए ATM ऑटोमेशन सिस्टम का विकास करेगा।

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airport Authority of India)

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (Airport Authority of India) केन्द्रीय नागरिक विमानन मंत्रालय के अधीन एक वैधानिक संगठन है। यह भारत में नागरिक विमानन अधोसंरचना प्रबंधन, अपग्रेडेशन इत्यादि कार्य करता है। इसकी स्थापना 1995 में हुई थी, इसका मुख्यालय नई दिल्ली में स्थित है। यह भारतीय हवाई क्षेत्र में हवाई यातायात प्रबंधन सेवा भी प्रदान करता है। यह भारत में 125 हवाईअड्डों का प्रबंधन करता है, इसमें 17 अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे, 7 सीमाशुल्क हवाईअड्डे, 78 घरेलु हवाईअड्डे इत्यादि शामिल हैं।

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भारतीय सेना ने किया रूसी इग्ला-एस मिसाइल प्रणाली का चुनाव

भारतीय सेना ने मैन-पोर्टेबल एयर डिफेन्स सिस्टम (MANPADS) के लिए रूसी इग्ला-एस मिसाइल प्रणाली का चुनाव किया है। रूसी रोसोबोरोनएक्सपोर्ट ने भारतीय सेना की वैरी शोर्ट रेंज एयर डिफेन्स (VSHORAD) सौदे के लिए 1.47 अरब डॉलर की बोली लगायी थी। इसके लिए फ्रांस की MBDA ने 3.68 अरब डॉलर तथा स्वीडन की SAAB ने 2.6 अरब डॉलर की बोली लगायी थी। इस सौदे पर दिसम्बर, 2018 में मास्को में सैन्य व तकनीकी सहयोग पर भारतीय-रूसी अंतरसरकारी आयोग की बैठक में हस्ताक्षर किये जाने की सम्भावना है।

इग्ला-एस (SA-24)

यह रूस की मैन-पोर्टेबल एयर-डिफेन्स प्रणाली का नवीनतम मॉडल है। यह भारत के पहले दिए गये SA-18 से काफी बेहतर है। इस प्रणाली को दृश्यमान हवाई लक्ष्यों को भेदने के लिए विकसित किया गया है, यह छोटी दूरी पर हेलीकाप्टर, UAV, क्रूज मिसाइल जैसे लक्ष्यों को भेद सकती हैं। इसकी अधिकतम रेंज 6 किलोमीटर है, यह सतह से 3 किलोमीटर की ऊंचाई तक किसी भी मौसमी परिस्थिति में लक्ष्य को भेद सकती है।

पृष्ठभूमि

भारतीय सेना ने वर्ष 2010 में VSHORAD मिसाइलों को प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी।  जनवरी 2018 में क्वालीफाई करने से पहले इसका कई बार परीक्षण किया गया। इसके लिए स्वीडन की SAAB द्वारा RBS70 NG तथा फ्रांस MBDA कंपनी की मिस्ट्रल मिसाइल भी स्पर्धा में थी। भारतीय सेना 1980 के दशक से इग्ला-एम सिस्टम का उपयोग कर रही है, यह हेलीकाप्टर, UAV और ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट से रक्षा के लिए अति महत्वपूर्ण है। भारतीय सेना ने 5,175 मिसाइल तथा सम्बंधित उपकरण खरीदने का प्रस्ताव रखा था। इनमे से 2300 मिसाइल पूर्ण रूप से तैयार होकर भारतीय सेना को मिलेंगीं, जबकि 260 मिसाइलें सेमी-नॉक्ड डाउन कंडीशन में, 1000 मिसाइलें कम्पलीटली नॉक्ड डाउन कंडीशन में मिलेंगी। शेष 600 मिसाइलों का निर्माण भारत में मेक-इन-इंडिया के तहत किया जायेगा।

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