Sangita Dhingra Sehgal

संगीता धींगरा सहगल को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया

संगीता धींगरा सहगल को भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया। उनका कार्यकाल पांच वर्ष का होगा। वर्तमान में संगीता धींगरा सहयोग दिल्ली उच्च न्यायालय में न्यायधीश के रूप में कार्यरत्त हैं।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (Competition Commission of India)

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग एक अर्ध-न्यायिक संवैधानिक संस्था है, इसकी स्थापना प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के तहत की गयी थी। इसकी स्थापना अक्टूबर, 2003 में हुई थी, इसने मई, 2009 में पूर्ण रूप से कार्य करना शुरू किया था। प्रतिस्पर्धा अधिनियम, 2002 के अनुसार इस आयोग का एक अध्यक्ष तथा न्यूनतम दो तथा अधिकतम 6 सदस्य होंगे। वर्तमान में भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग के 4 सदस्य तथा एक अध्यक्ष हैं। यह आरम्भ से कॉलेजियम के रूप में कार्य कर रहा है। यह आयोग कॉर्पोरेट मामले मंत्रालय के अधीन कार्य करता है।

भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को बुरे तरीके से प्रभावित करने वाले कारकों को रोकथाम, ग्राहकों के हितों की सुरक्षा तथा मुक्त व्यापार सुनिश्चित करना है। यह किसी संवैधानिक संस्था को प्रतिस्पर्धा सम्बन्धी मामले में अपनी राय भी प्रदान करता है। यह आयोग प्रतिस्पर्धा सम्बन्धी मामले में जागरूकता फैलाने का कार्य भी करता है।

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सरकार ने लिट्टे पर प्रतिबन्ध लगाने के लिए ट्रिब्यूनल का गठन किया

भारत सरकार ने लिबरेशन ऑफ़ टाइगर्स ऑफ़ तमिल ईलम (लिट्टे) पर प्रतिबन्ध लगाने पर निर्णय लेने के लिए एक ट्रिब्यूनल का गठन किया है।

मुख्य बिंदु

  • हाल ही में केन्द्रीय गृह मंत्रालय ने गैर-कानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के सेक्शन 3 के सब-सेक्शन (1) तथा (3) के तहत तहत लिट्टे पर इस प्रतिबन्ध को पांच वर्ष तक बढ़ा दिया था।
  • मई, 2009 में लिट्टे की सैन्य हार के बाद भी यह संगठन भारत के विरुद्ध अपनी स्थिति को बरकरार रखे हुए है, यह भारतीय नागरिकों के लिए अभी भी एक बड़ा खतरा है।
  • लिट्टे ने अभी भी तमिल ईलम की संकल्पना को नहीं छोड़ा है और यह यूरोप में इसके लिए फण्ड एकत्रित कर रहा है।
  • लिट्टे को गैर-कानूनी संगठन घोषित करने के लिए पर्याप्त कारण है अथवा नहीं, इसका निर्णय केंद्र द्वारा गठित ट्रिब्यूनल द्वारा किया जायेगा। इस ट्रिब्यूनल में दिल्ली उच्च न्यायालय की जस्टिस संगीता धींगरा सहगल शामिल हैं।
  • यह एक श्रीलंकाई उग्रवादी व राजनीतिक संगठन है, इसकी स्थापना 1976 में की गयी थी। इसका उद्देश्य श्रीलंका के पूर्व तथा उत्तर में स्वतंत्र तमिल ईलम देश का निर्माण करना है। 1991 में लिट्टे के सदस्यों द्वारा राजीव गाँधी की हत्या किये जाने के बाद भारत सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबन्ध लगा दिया था।

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